‘Validation Act of CCS Pension Rules, 1972’ को पेंशनभोगियों के हितों के विरुद्ध बताते हुए व्यापक आंदोलन की घोषणा
शिलचर, 25 जुलाई। शिलचर में शनिवार को ‘फोरम ऑफ सिविल पेंशनर्स एसोसिएशंस’ की स्थानीय इकाई का गठन किया गया। मध्यशहर सांस्कृतिक समिति सभागार में आयोजित संयुक्त सम्मेलन में छह संस्थापक पेंशनर्स संगठनों सहित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की सहमति से स्थानीय इकाई का गठन हुआ। सम्मेलन के दौरान वर्ष 2025 में केंद्र सरकार द्वारा पारित ‘Validation Act of CCS Pension Rules, 1972’ को पेंशनभोगियों के हितों के विरुद्ध बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई।
सम्मेलन में वक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक D.S. Nakara & Ors. बनाम Union of India मामले के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा कि पेंशन कोई दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि सेवाकाल के दौरान अर्जित वेतन का स्थगित हिस्सा (Deferred Wage) है। वक्ताओं के अनुसार, सभी पेंशनभोगी एक समान वर्ग (Homogeneous Class) हैं और केवल सेवानिवृत्ति की तारीख के आधार पर पुराने एवं नए पेंशनभोगियों के बीच भेदभाव असंवैधानिक है।
उन्होंने कहा कि किसी कानून के माध्यम से पेंशनभोगियों के संवैधानिक अधिकारों को छीना नहीं जा सकता। सम्मेलन में स्पष्ट रूप से कहा गया— “हमें Validation नहीं, बल्कि Rectification और Pension Revision चाहिए।”
फोरम के प्रतिनिधियों ने बताया कि संगठन केंद्र एवं राज्य स्तर पर चलाए जा रहे संगठनात्मक तथा कानूनी आंदोलनों के साथ समन्वय करते हुए जनजागरूकता अभियान चलाएगा और पेंशन व्यवस्था के अधिकारों की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष करेगा। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों एवं बीमा क्षेत्र के पेंशनभोगियों के लिए वेतन संशोधन के अनुरूप पेंशन पुनर्निर्धारण की मांग को लेकर भी आंदोलन जारी रखा जाएगा।
सम्मेलन की शुरुआत छह केंद्रीय सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के पेंशनर्स संगठनों की भागीदारी से हुई, जबकि सम्मेलन के दौरान पांच और संगठनों ने फोरम से जुड़ने की घोषणा की। इस अवसर पर सुजीत चौधरी ने प्रस्ताव पेश किया। समीरन भट्टाचार्य, अतिन देव चौधरी, हिमानीश चौधरी, प्रतिमा दास पाल, रजत पुरकायस्थ, अमलेंदु दे और दीपक चक्रवर्ती सहित अन्य वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
नई कार्यकारिणी में समीरन भट्टाचार्य को अध्यक्ष तथा सुजीत चौधरी को सचिव चुना गया। दीपक चक्रवर्ती, मानस दास और अतिन देव चौधरी को उपाध्यक्ष तथा हिमानीश चौधरी को कोषाध्यक्ष बनाया गया। कुल 18 सदस्यों वाली कार्यकारिणी समिति का गठन किया गया।
फोरम से जुड़े संगठनों ने समान अनुपात में आर्थिक सहयोग देकर आगामी कार्यक्रमों को संचालित करने का आश्वासन दिया। सम्मेलन में उपस्थित पेंशनभोगियों ने संकल्प लिया कि “पेंशन एक संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष किया जाएगा।”