विभाजन का पूर्वोत्तर के जनजातीय समाज पर पड़ा गहरा प्रभाव : प्रो. बिनायक दत्त

कल्याण आश्रम दक्षिण असम प्रांत के तत्वावधान में आयोजित हुआ प्रो. गांगमुमेइ कामेई द्वितीय स्मृति व्याख्यान

रितेश व जसवंत, शिलचर, 24 अक्टूबर। कल्याण आश्रम दक्षिण असम प्रांत के तत्वावधान में शुक्रवार को प्रो. गांगमुमेइ कामेई द्वितीय स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। संत तुलसीदास सरनी, पीडब्ल्यूडी रोड स्थित वनवासी कल्याण आश्रम शिलचर छात्रावास के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘1947 का भारत विभाजन और उत्तर-पूर्वांचल का जनजातीय समाज’ था।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता नॉर्थ ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (एनईएचयू), शिलांग के इतिहास विभाग के प्रोफेसर बिनायक दत्त ने विभाजन के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1947 के भारत विभाजन का प्रभाव केवल राजनीतिक और भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समाज, संस्कृति और सामाजिक संरचना को भी गहराई से प्रभावित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु नायक ने की। इस अवसर पर कल्याण आश्रम दक्षिण असम प्रांत के सह-सभापति श्रीलंग रंगमाई तथा संगठन मंत्री केदार कुलकर्णी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संगठन मंत्री ने प्रोफेसर गांगमुमेइ कामेई के जीवन, उनके विचारों और जनजातीय समाज के उत्थान के लिए किए गए योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

कार्यक्रम का शुभारंभ मेहरपुर रंगमई पुंजी से आई माताओं द्वारा प्रस्तुत उद्बोधनी प्रार्थना गीत से हुआ। समापन छात्रावास के विद्यार्थियों द्वारा राष्ट्रगीत के गायन के साथ किया गया।

इस अवसर पर कल्याण आश्रम के कार्यकर्ता, छात्रावास के विद्यार्थी और स्थानीय बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

Leave a Comment