डॉ. कृष्ण गोपाल बोले— शिक्षा निशुल्क होनी चाहिए, प्रतिभाशाली निर्धन विद्यार्थियों का सहयोग समाज की जिम्मेदारी
लखनऊ से विशेष प्रतिनिधि, 19 जूलाई। भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा संचालित महामना शिक्षण संस्थान के नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत एवं पूर्व विद्यार्थियों के सम्मान में रविवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में शिक्षा, संस्कार, राष्ट्रनिर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे तथा आर्थिक रूप से कमजोर किंतु प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत में प्राचीन काल से शिक्षा निशुल्क देने की गौरवशाली परंपरा रही है। देश विश्व का ज्ञान केंद्र था, जहाँ दूर-दूर से विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों और बाद में अंग्रेजी शासन के दौरान भारतीय शिक्षा व्यवस्था को गंभीर क्षति पहुँची तथा शिक्षा को शुल्क आधारित बनाया गया।
उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का स्पष्ट मत था कि बच्चों को योग्य बनाना समाज का दायित्व है। यदि विद्यार्थी शिक्षा के लिए भारी शुल्क चुकाने को विवश होंगे तो समाज के प्रति उनके दायित्वबोध पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आज देश में आधुनिक राजमार्ग, हवाई अड्डे और उद्योगों का तेजी से विकास हो रहा है, किंतु शिक्षा व्यवस्था में समान अवसरों का अभाव चिंता का विषय है। यह असमानता समाज में निराशा और हताशा को जन्म देती है।
डॉ. कृष्ण गोपाल ने महामना पंडित मदन मोहन मालवीय का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय में निर्धन विद्यार्थियों की फीस माफ करने जैसी अनेक लोकहितकारी पहल की थीं। उन्होंने महामना शिक्षण संस्थान द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को दी जा रही सहायता की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ के विद्यार्थी ज्ञान, संस्कार और चरित्र के बल पर समाज को भोगवाद, नशाखोरी और नैतिक पतन जैसी चुनौतियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने समाज से अपील की कि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति किसी न किसी प्रतिभाशाली निर्धन विद्यार्थी की शिक्षा का दायित्व उठाए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ शिक्षाविद् डॉ. दुर्ग सिंह चौहान ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि भारत का भविष्य केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि संस्कारवान नागरिकों के निर्माण से सुरक्षित होगा। इसके लिए महामना शिक्षण संस्थान जैसे सेवा एवं शिक्षा आधारित प्रकल्पों का विस्तार समय की आवश्यकता है।
भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईआईटी) लखनऊ के निदेशक प्रो. अरुण मोहन शैरी ने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन आर्थिक अभाव के कारण अनेक मेधावी विद्यार्थी प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने से वंचित रह जाते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि यदि जीवन में बड़ा लक्ष्य प्राप्त करना है तो मोबाइल और सोशल मीडिया पर अनावश्यक समय व्यतीत करने की आदत छोड़नी होगी। सफलता अनुशासन, परिश्रम और सतत अध्ययन से ही प्राप्त होती है।
संस्थान की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों के मार्गदर्शक आदित्य सर ने कहा कि महामना शिक्षण संस्थान केवल एक शिक्षण संस्था नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने वाला राष्ट्रनिर्माण का अभियान है। वर्ष 2019 में भाऊराव देवरस सेवा न्यास द्वारा प्रारंभ किए गए इस प्रकल्प का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर किंतु प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आवास, अनुशासित वातावरण, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन, व्यक्तित्व विकास, नैतिक शिक्षा, योग, संस्कार तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की समुचित तैयारी उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि स्थापना के बाद से छह शैक्षणिक सत्रों में अध्ययनरत 85 विद्यार्थियों में से 73 विद्यार्थियों ने प्रथम प्रयास में सफलता प्राप्त कर देश के विभिन्न प्रतिष्ठित तकनीकी एवं व्यावसायिक संस्थानों में प्रवेश हासिल किया है। वर्तमान में 20 विद्यार्थी कक्षा 12 में अध्ययनरत हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
संस्थान के विद्यार्थियों ने आईआईटी पटना, एनआईटी, एचबीटीयू कानपुर, एमएमएमयूटी गोरखपुर, आईईटी लखनऊ, आईईआरटी प्रयागराज, एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों तथा एमबीबीएस जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त कर संस्थान का नाम रोशन किया है। एक विद्यार्थी ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण कर अयोध्या मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त किया, जबकि संस्थान के अनेक पूर्व विद्यार्थी देश की प्रतिष्ठित कंपनियों और संस्थानों में सेवाएँ दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि महामना शिक्षण संस्थान का बालक एवं बालिका प्रकल्प समान अवसर, समान सम्मान और समान विकास की भावना पर आधारित है। संस्थान का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को परीक्षा में सफल बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वासी, संवेदनशील, संस्कारवान और राष्ट्रभक्त नागरिक के रूप में तैयार करना है।
संस्थान के अध्यक्ष एवं पूर्व सूचना आयुक्त प्रमोद कुमार तिवारी ने संस्थान से शिक्षा पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं सम्मान चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया तथा उन्हें समाज सेवा और राष्ट्रहित के लिए समर्पित रहने की प्रतिज्ञा दिलाई।
श्रीमती अणीमा जामवाल ने बालिका प्रकल्प की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्थान में अध्ययनरत बालिकाओं की निरंतर प्रगति इस परियोजना की सफलता का प्रमाण है। वहीं डॉ. विनय गुप्ता ने संस्थान के दानदाताओं एवं सहयोगियों के योगदान की जानकारी दी और उनके प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वर-मंत्र पाठ प्रस्तुत किया। डॉ. शीला मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया तथा कार्यक्रम का संचालन अनघ जी ने किया।
समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन जी, पूर्व क्षेत्र प्रचारक शिवनारायण जी, प्रांत प्रचारक कौशल जी, संस्थान के प्रमुख कार्यकर्ता अवनींद्र जी, रामशरण वर्मा, सुभाष शर्मा, अनिल मिश्रा, बलराम जी, सतीश जी, अनिल जी, विनय प्रकाश जी, नरेंद्र मिश्रा जी, वेंकटेश जी सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद्, समाजसेवी, अभिभावक, पूर्व विद्यार्थी और छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।