शिव कुमार शिलचर, 18 जुलाई: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) शिलचर के परिसर से होकर गुजरने वाले भोराखाई चाय बागान के लोगों के वर्षों पुराने आवागमन मार्ग को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। शनिवार सुबह हजारों की संख्या में ग्रामीण संस्थान के तीसरे गेट के समीप एकत्र हुए और विरोध प्रदर्शन करते हुए उस गेट को हटा दिया, जिसे ग्रामीणों के अनुसार बिना किसी पूर्व सूचना के मार्ग पर लगा दिया गया था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भूमि पर पहले रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज (आरईसी) की स्थापना हुई थी और बाद में उसका विस्तार होकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) शिलचर बना, उसी समय से भोराखाई चाय बागान के लोगों का आवागमन संस्थान परिसर के भीतर से बने इस रास्ते से होता रहा है। ग्रामीणों के अनुसार दशकों से यही मार्ग उनके दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसी रास्ते से लोग अपने कार्यस्थलों, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, बाजार और अन्य आवश्यक स्थानों तक पहुंचते रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों पहले भी इसी मार्ग पर गेट लगाकर आवागमन रोकने का प्रयास किया गया था। उस समय पूरे क्षेत्र के लोगों ने इसका जोरदार विरोध किया था और बड़ी संख्या में एकत्र होकर लगाए गए गेट को हटा दिया था। मामला तत्कालीन जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचने के बाद जिलाधिकारी की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई थी।

स्थानीय लोगों के अनुसार उस बैठक में यह सहमति बनी थी कि भोरिखाई चाय बागान के लोगों का आवागमन पूर्व की तरह संस्थान परिसर के भीतर से जारी रहेगा। साथ ही यह भी तय किया गया था कि यदि किसी विशेष परिस्थिति या सुरक्षा कारणों से कभी गेट बंद करना आवश्यक हो, तो उससे पहले स्थानीय ग्रामीणों को इसकी जानकारी दी जाएगी, ताकि किसी प्रकार की असुविधा या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस बार उस समझौते का पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक मार्ग पर गेट लगा दिया गया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। जैसे ही इसकी जानकारी आसपास के लोगों को मिली, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई और लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए गेट को हटा दिया।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि यह रास्ता केवल एक मार्ग नहीं, बल्कि भोराखाई चाय बागान के हजारों लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि वर्षों से उपयोग में आ रहे इस रास्ते को बंद किए जाने से विद्यार्थियों, बुजुर्गों, मरीजों, श्रमिकों और आम नागरिकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि पूर्व में हुए समझौते का सम्मान किया जाए और लोगों के पारंपरिक आवागमन के अधिकार को बरकरार रखा जाए। घटना के दौरान कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के कारण माहौल गर्म हो गया, हालांकि बाद में स्थिति सामान्य हो गई। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे चाहते हैं कि इस विवाद का स्थायी समाधान आपसी संवाद और प्रशासन की पहल से निकाला जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
हालांकि, इस पूरे मामले में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान शिलचर का आधिकारिक पक्ष समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सका है। संस्थान और जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।