शहीद जगन्मय देव और दिव्येंदु दास को दी गई श्रद्धांजलि
गौतम सरकार, रामकृष्णनगर, 21 जुलाई। बराक घाटी बंग साहित्य एवं संस्कृति सम्मेलन की रामकृष्णनगर क्षेत्रीय समिति के तत्वावधान में रविवार को रामकृष्णनगर नेताजी बाग स्थित अस्थायी शहीद वेदी पर 40वां भाषा शहीद दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मातृभाषा आंदोलन के शहीद जगन्मय देव और दिव्येंदु दास को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष डॉ. कृष्णरंजन पाल ने की। उपस्थित गणमान्य लोगों ने दोनों शहीदों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद आयोजित सभा में वक्ताओं ने 21 जुलाई के ऐतिहासिक महत्व तथा मातृभाषा आंदोलन के शहीदों के बलिदान को याद किया।
डॉ. कृष्णरंजन पाल ने कहा कि बराक घाटी में 21 जुलाई का दिन शहीदों की स्मृति और उनके बलिदान को नमन करने के लिए मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि 1986 में करीमगंज में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जगन्मय देव और दिव्येंदु दास की हत्या की गई थी, लेकिन आज तक इस घटना का न्याय नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को न्याय दिलाने की मांग आज भी प्रासंगिक है।
सभा की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. माला शर्मा ने कहा कि 21 जुलाई 1986 को मातृभाषा के लिए शहीद हुए लोगों के प्रति समाज का कर्तव्य है कि वह उनके बलिदान को हमेशा याद रखे। उन्होंने कहा कि बंगला भाषा के लिए बार-बार संघर्ष और बलिदान देना पड़ा है। उन्होंने सभी से अपनी मातृभाषा को गर्व के साथ सीखने, पढ़ने और उसके विकास के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
संस्था के पूर्व संपादक कृष्ण चौधरी ने कहा कि 1986 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत द्वारा जारी एक भाषा संबंधी सर्कुलर के बाद बराक घाटी में व्यापक विरोध हुआ था। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई 1986 को करीमगंज में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान बंगला भाषा-प्रेमियों ने शांतिपूर्ण ढंग से काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन किया था। इसी दौरान पुलिस गोलीबारी में जगन्मय देव और दिव्येंदु दास शहीद हो गए।
कार्यक्रम में संस्था की सांस्कृतिक संपादिका कावेरी सरकार, साहित्य संपादिका मंदिरा देवराय, राजदीप तालुकदार, ऋषिकेश तालुकदार, तापस पाल, जगतदीप तालुकदार, सुप्रिय घोष सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।