रामकृष्णनगर में संस्कार भारती का दो दिवसीय छठा ‘कला साधक संगम’ सफलतापूर्वक संपन्न

रामकृष्णनगर में संस्कार भारती का दो दिवसीय छठा ‘कला साधक संगम’ सफलतापूर्वक संपन्न

हीरक बनिक, रामकृष्णनगर, 21 जनवरी
संस्कार भारती रामकृष्णनगर शाखा के तत्वावधान में रामकृष्ण विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में आयोजित दो दिवसीय छठा कला साधक संगम कार्यक्रम सफलता के साथ संपन्न हुआ। शनिवार एवं रविवार को आयोजित इस सांस्कृतिक महायज्ञ में स्थानीय कलाकारों की स्वस्फूर्त भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। दो दिवसीय इस आयोजन के अंतर्गत लोकनृत्य, सृजनात्मक नृत्य, देशभक्ति गीत, तबला लहरा, शास्त्रीय संगीत सहित विभिन्न विधाओं में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा और कौशल के विकास का अवसर प्राप्त हुआ। 17 जनवरी को दीप प्रज्वलन के साथ छठे कला साधक संगम का शुभारंभ किया गया। दीप प्रज्वलन रामकृष्णनगर के सर्किल अधिकारी सौविक दत्त द्वारा किया गया। उद्घाटन समारोह में रामकृष्ण विद्यापीठ स्कूल के प्रधानाचार्य विश्वजीत नाथ, रामकृष्णनगर कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अर्जुन देवनाथ, असम विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के अध्यक्ष डॉ. जगन्नाथ बर्मन, संस्कार भारती के प्रांत संपादक विश्वतोष देव, रामकृष्ण विद्यापीठ हायर सेकेंडरी स्कूल के पूर्व प्रधानाचार्य शरदिंदु नाथ मजूमदार, रामकृष्णनगर नगरपालिका की चेयरपर्सन प्रतिमा नाथ सहित संस्कार भारती के विभिन्न पदाधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथियों को संस्था की ओर से सम्मानित किया गया। स्वागत भाषण आयोजन समिति के अध्यक्ष धनंजय नाथ ने दिया। भारतीय संगीत साधना के इतिहास एवं उसके महत्व पर असम विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के प्राध्यापक डॉ. जगन्नाथ बर्मन ने महत्वपूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया। साथ ही अन्य आमंत्रित अतिथियों ने संक्षिप्त वक्तव्यों के माध्यम से इस सांस्कृतिक आयोजन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। इसके पश्चात प्रतियोगितात्मक सांस्कृतिक कार्यक्रम आरंभ हुए, जिनमें स्थानीय कुशल कलाकारों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को विशेष रूप से मंत्रमुग्ध किया। प्रतियोगिता के उपरांत विभिन्न वर्गों के विजेताओं के बीच पुरस्कार वितरण किया गया। विजेताओं को स्मृति-चिह्न एवं प्रमाण-पत्र संस्कार भारती रामकृष्णनगर शाखा के पदाधिकारियों एवं उपस्थित विशिष्टजनों द्वारा प्रदान किए गए। सभी प्रतिभागियों को भी सहभागिता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को आगामी अप्रैल माह में प्रांतीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिलेगा। दो दिवसीय इस आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त संगीत कलाकार विमलेंदु दास का संगीत कार्यक्रम तथा पाथरकांदी की चतुरंग नाट्य संस्था द्वारा प्रस्तुत नाटक ‘आलोक दिशारी’ रहा। नाटक में लवंगलता की भूमिका में कलाकार रूपश्री कर के अभिनय को दर्शकों ने विशेष सराहना दी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रवंदना के साथ हुआ। इस अवसर पर संस्कार भारती की पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय शुक्ला भट्टाचार्य की स्मृति में उनके परिवार को मरणोपरांत सम्मान प्रदान कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उल्लेखनीय है कि इस दो दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन में लगभग 250 प्रतियोगियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में आयोजन समिति की सचिव शर्मिला भट्टाचार्य, सह-अध्यक्ष मौमिता श्याम, पौलमी चक्रवर्ती, दीपंकर शील, अरुण पाल, दीपायन दे, समीरन नाथ, जयंत श्याम चौधुरी, सुमंत देव, मनश्री राय, शशबिंदु दे सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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