विद्यार्थियों ने कविता एवं वक्तव्य के माध्यम से हिंदी के महत्व पर रखे विचार
रामकृष्णनगर, 14 सितंबर (गौतम सरकार): रामकृष्णनगर कॉलेज के हिंदी विभाग के तत्वावधान में रविवार को 76वां राष्ट्रीय हिंदी दिवस हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के प्राचार्य अर्जुन देवनाथ, हाइलाकांदी एस.एस. कॉलेज के प्राचार्य रतन कुमार तथा अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद अतिथियों का उत्तरिय पहनाकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
समारोह में कॉलेज के विद्यार्थियों ने हिंदी दिवस के महत्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए तथा हिंदी कविताओं का पाठ किया। उपस्थित विशिष्ट अतिथियों एवं शिक्षकों ने भी हिंदी भाषा के महत्व, उसकी उपयोगिता और देश की भाषाई विविधता में हिंदी की भूमिका पर अपने विचार रखे।
कॉलेज के प्राचार्य अर्जुन देवनाथ ने कहा कि हिंदी न तो अत्यंत कठिन भाषा है और न ही अत्यंत सरल, बल्कि नियमित अभ्यास से इसे सहजता से सीखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में यात्रा एवं संपर्क के दौरान हिंदी का ज्ञान काफी उपयोगी होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा बंगला के साथ हिंदी को भी उचित महत्व देने का आह्वान किया।
हाइलाकांदी एस.एस. कॉलेज के प्राचार्य रतन कुमार ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले हिंदीभाषी लोगों के लिए हिंदी दिवस विशेष महत्व रखता है। हिंदी के प्रति सम्मान और भाषा के विकास के उद्देश्य से हर वर्ष विभिन्न स्थानों पर हिंदी दिवस मनाया जाता है।
कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग के अध्यापक दीपंकर दास ने कहा कि विद्यार्थियों के लिए अधिक से अधिक भाषाओं का ज्ञान लाभदायक है। वर्तमान समय में सामाजिक एवं व्यावसायिक जीवन में बंगला, हिंदी और अंग्रेजी—तीनों भाषाओं का ज्ञान विशेष रूप से उपयोगी है।
कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष रामाधर प्रजापति ने हिंदी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी ऐतिहासिक अवसर की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।
समारोह में संस्कृत विभाग की अध्यापिका अर्चना चक्रवर्ती, गणित विभाग के अध्यापक प्रशांत नाथ, अन्य अध्यापक-अध्यापिकाएं तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। हिंदी दिवस के अवसर पर कॉलेज परिसर में उत्साह एवं भाषाई गौरव का वातावरण देखने को मिला।