उधारबंद सहकारी समिति की वार्षिक आमसभा आयोजित

विकास एवं कारोबार विस्तार के लिए एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान

उधारबंद, (नीहार कांति राय): उधारबंद सहकारी समिति की वार्षिक आमसभा रविवार को समिति कार्यालय में अध्यक्ष सैफुल हक बड़ा भुइयां की अध्यक्षता में आयोजित हुई। सभा में वर्ष 2025-26 के आय-व्यय का लेखा-जोखा, वर्ष 2026-27 का बजट तथा समिति के भविष्य के विकास एवं कारोबार विस्तार पर चर्चा की गई।

सचिव अब्दुस छामाद लस्कर ने आय-व्यय का विवरण एवं आगामी वर्ष का बजट प्रस्तुत किया। प्रस्तावित बजट में करीब डेढ़ लाख रुपये की आय दर्शाई गई। उन्होंने कहा कि निदेशक मंडल समिति के विकास और कारोबार विस्तार के लिए एकजुट होकर कार्य कर रहा है।

समिति के आंतरिक लेखा परीक्षक जहरुल हुसैन बड़ा लस्कर के निधन से रिक्त पद पर शेयरधारकों के प्रस्ताव के आधार पर विराज राय तथा पूर्व सचिव एवं पूर्व वरिष्ठ निरीक्षक व ऑडिटर अब्दुल ताहिर बड़ा लस्कर को आंतरिक लेखा परीक्षक नियुक्त किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए नाबार्ड के डीडीएम रविशंकर ने कारोबार विस्तार तथा सदस्यों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने केसीसी ऋण सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं एवं वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी और समिति को बराक घाटी की एक महत्वपूर्ण संस्था बनाने के लिए सामूहिक सहयोग का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि विधायक राजदीप गोयाला के प्रतिनिधि असीम देव ने समिति के इतिहास एवं इसके विकास में योगदान देने वाले पूर्व पदाधिकारियों को याद किया और भविष्य में सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि गुरुचरण विश्वविद्यालय परिसर के निर्माण के लिए ईस्टामपुर चाय बागान क्षेत्र में 200 बीघा भूमि आवंटित करने की पहल की गई है। इस संबंध में 15 सितंबर को लैंड एडवाइजरी कमेटी की बैठक में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

राशन व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को समय पर चावल, दाल और चीनी उपलब्ध कराने के लिए राशन डीलरों को जिम्मेदारी से कार्य करना होगा। शिकायत प्रमाणित होने पर कार्रवाई की जाएगी।

अध्यक्ष सैफुल हक बड़ा भुइयां ने कहा कि निदेशक मंडल और सदस्यों के सामूहिक प्रयास से समिति विकास की ओर बढ़ रही है। सभा में महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी सदस्यों को नियमित रूप से देने पर भी जोर दिया गया।

अंत में दिवंगत लेखा परीक्षक जहरुल हुसैन बड़ा लस्कर (टुनू मियां) और पूर्व सहकारिता मंत्री सिद्दिकी अहमद की स्मृति में एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।

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