रामकृष्णनगर कॉलेज में मुफ्त प्रवेश की मांग को लेकर एबीवीपी का धरना, बारिश में भी जारी रहा प्रदर्शन

रामकृष्णनगर, 11 जुलाई। गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी कॉलेज में निःशुल्क प्रवेश की सुविधा बहाल करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की रामकृष्णनगर इकाई के नेतृत्व में शनिवार को रामकृष्णनगर कॉलेज के विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर के मुख्य द्वार के सामने धरना-प्रदर्शन किया। तेज बारिश के बावजूद छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर डटे रहे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुफ्त प्रवेश योजना को पुनः लागू करने की मांग उठाई।

प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना था कि पिछले वर्ष सरकार ने सभी छात्रों को निःशुल्क प्रवेश का लाभ दिया था, लेकिन इस वर्ष तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर के उन विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है जिनके पिछले सेमेस्टर में बैकलॉग (बैक पेपर) हैं। उनका आरोप है कि अचानक मात्र तीन दिनों के भीतर लगभग 3,600 रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई छोड़ने की नौबत आ सकती है।

एबीवीपी रामकृष्णनगर इकाई के सचिव युवराज देवदास ने कहा कि यदि सरकार अपना निर्णय वापस नहीं लेती है तो कॉलेज के लगभग 90 प्रतिशत विद्यार्थी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि अल्प समय में इतनी बड़ी राशि जुटाना अधिकांश विद्यार्थियों के लिए संभव नहीं है, इसलिए सरकार को पिछले वर्ष की तरह इस बार भी सभी छात्रों के लिए निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था करनी चाहिए।

छात्रा सुस्मिता कोहार ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब पिछले वर्ष मुफ्त प्रवेश दिया गया था तो इस वर्ष उससे वंचित करना उचित नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि परीक्षा परिणाम जारी करने में महीनों लग जाते हैं और कई बार परिणाम भी अधूरा जारी किया जाता है।

इधर, रामकृष्णनगर कॉलेज के प्राचार्य अर्जुन देवनाथ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन कॉलेज प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य सरकार की नई नीति के विरोध में है। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को असम सरकार के आयुक्त एवं सचिव द्वारा जारी परिपत्र तथा उसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय से प्राप्त निर्देश के अनुसार तृतीय एवं पंचम सेमेस्टर के जिन विद्यार्थियों के पिछले सेमेस्टर में बैक पेपर हैं, उन्हें अब निःशुल्क प्रवेश का लाभ नहीं मिलेगा और उन्हें निर्धारित शुल्क जमा कर प्रवेश लेना होगा।

प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज प्रशासन केवल सरकारी आदेशों का पालन कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रारंभ में कॉलेज ने पूर्व की व्यवस्था के अनुसार मुफ्त प्रवेश की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन सरकार के नए निर्देश मिलने के बाद संशोधित अधिसूचना जारी करनी पड़ी। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि उन्हें इस नीति पर आपत्ति है तो वे अपनी मांग सरकार के समक्ष रखें, क्योंकि इस संबंध में निर्णय लेने का अधिकार सरकार के पास है, न कि कॉलेज प्रशासन के पास।

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