मोतीनगर में भूबन पहाड़ के पाददेश से मृत बाघ बरामद, इलाके में सनसनी

मोतीनगर में भूबन पहाड़ के पाददेश से मृत बाघ बरामद, इलाके में सनसनी

मोतीनगर से सटे भूबन पहाड़ के नीचे स्थित भूबन नगर क्षेत्र में आज एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। स्थानीय लोगों ने पहाड़ के पाददेश के एक सुनसान इलाके में एक बाघ को देखा, लेकिन दुर्भाग्यवश वह जीवित नहीं था। मृत अवस्था में बाघ मिलने की खबर फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सुबह कुछ ग्रामीणों ने भूबन पहाड़ के नीचे बाघ का निथर शव पड़ा हुआ देखा, जिसके बाद इसकी सूचना तुरंत आसपास के इलाकों में फैल गई। खबर मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ वन विभाग को भी सूचित किया गया। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में ले लिया और प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। बाघ के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान हैं या नहीं, इसकी भी बारीकी से जांच की जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि भूबन पहाड़ और उसके आसपास के वन क्षेत्रों में अब भी बाघों की मौजूदगी है, जो इस इलाके की जैव विविधता और वन संपदा के लिए बेहद महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। पर्यावरणविदों और वन विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार घटते वन क्षेत्र, अवैध कटाई और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण बाघ सहित अन्य वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास खतरे में पड़ता जा रहा है। इसी वजह से कई बार वन्यजीव रिहायशी इलाकों की ओर भटक आते हैं।

स्थानीय निवासियों के एक वर्ग ने वन क्षेत्रों की पर्याप्त निगरानी और संरक्षण के अभाव को इस तरह की घटनाओं का कारण बताया है। फिलहाल बाघ की मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। यह स्वाभाविक मृत्यु है, बीमारी या भोजन की कमी का परिणाम है, अथवा शिकारियों की करतूत—इन सभी पहलुओं की जांच की मांग की जा रही है। वन विभाग के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी।

इस घटना के बाद वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विभिन्न संगठनों और जागरूक नागरिकों ने वन क्षेत्र से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों में जागरूकता बढ़ाने, वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर सुनिश्चित करने और अवैध शिकार पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है।

उल्लेखनीय है कि मृत बाघ की तस्वीरें भी सामने आई हैं और लोगों से अपील की जा रही है कि इस मामले को व्यापक रूप से साझा कर प्रशासन और वन विभाग का ध्यान आकर्षित किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

कुल मिलाकर, मोतीनगर–भूबन पहाड़ क्षेत्र की यह घटना केवल एक वन्यजीव की मृत्यु नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, वन सुरक्षा और मानव-प्रकृति सहअस्तित्व की गंभीर वास्तविकता को एक बार फिर उजागर करती है।

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