महामना शिक्षण संस्थान की कार्यशाला में मानव मूल्यों पर हुआ मंथन, विद्वानों ने विद्यार्थियों का किया मार्गदर्शन

लखनऊ। प्रेरणा भारती डिजिटल न्यूज़ नेटवर्क।

महामना शिक्षण संस्थान के तत्वावधान में लखनऊ में ‘मानव मूल्य एवं सर्वांगीण विकास’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में संस्थान के पूर्व विद्यार्थियों, वर्तमान छात्रों और नवप्रवेशी विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, मानव मूल्य, सेवा भावना, सामाजिक दायित्व और राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर संस्थान के प्रमुख अवनिंद्र चतुर्वेदी एवं अन्य पदाधिकारियों ने मंचासीन अतिथियों का स्वागत और सम्मान किया।

प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांतरंजन जी ने भारत रत्न महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के जीवन, उनके आदर्शों, शिक्षा दर्शन और राष्ट्र निर्माण में उनके अप्रतिम योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जनकल्याण के बड़े लक्ष्य की शुरुआत भी छोटे-छोटे प्रयासों से होती है।

क्षेत्र प्रचारक अनिल जी ने ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ विषय पर अपने विचार रखते हुए सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का मूल आधार बताया। उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन, हरिद्वार के संस्थापक आशीष गौतम जी के सेवा कार्यों का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों को समाज के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया।

कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में डॉ. दुर्ग सिंह चौहान, आईआईएम लखनऊ के निदेशक प्रो. एम.पी. गुप्ता सहित अनेक विद्वानों और शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। वक्ताओं ने मानव मूल्यों, नैतिक आचरण, नेतृत्व क्षमता, चरित्र निर्माण और सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे।

समापन सत्र को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल जी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार, संवेदनशील और राष्ट्रनिष्ठ नागरिक तैयार करना है, जो समाज और राष्ट्र के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सेवा भावना को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय की वरिष्ठ अध्यापिका डॉ. शीला मिश्रा, प्रसिद्ध वनस्पति विज्ञानी प्रो. ए.के. शासनी सहित अनेक शिक्षाविद् एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यशाला ने पूर्व और वर्तमान विद्यार्थियों के बीच संवाद एवं आत्मीय संपर्क का भी अवसर प्रदान किया। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को प्रेरणादायी, उपयोगी और व्यक्तित्व विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

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