मंत्री कौशिक राय के आश्वासन पर छह घंटे बाद विष्णुप्रिया मणिपुरी समुदाय का सत्याग्रह व आमरण अनशन स्थगित
रानू दत्त की रिपोर्ट | शिलचर | 6 फरवरी
विष्णुप्रिया मणिपुरी समुदाय की वर्षों पुरानी और न्यायोचित मांगों को लेकर गुरुवार को शिलचर में शुरू हुआ सत्याग्रह आंदोलन एवं आमरण अनशन छह घंटे बाद अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया। यह निर्णय राज्य के मंत्री कौशिक राय द्वारा मांगों पर सकारात्मक विचार एवं समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद लिया गया।
सुबह 11 बजे से शहीद खुदीराम बोस की प्रतिमा के समक्ष आंदोलनकारियों ने आमरण अनशन प्रारंभ किया था। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। बाद में मंत्री कौशिक राय का संदेश लेकर धलाई के विधायक निहाररंजन दास आंदोलन स्थल पर पहुंचे और सरकार की ओर से मांगों को गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया। इसके पश्चात विधायक ने स्वयं आंदोलनकारियों को पानी पिलाकर अनशन तुड़वाया।
उल्लेखनीय है कि विष्णुप्रिया भाषा को प्राथमिक शिक्षा के स्तर पर शिक्षण माध्यम के रूप में लागू करने, भाषा शिक्षकों के पद सृजन तथा केंद्रीय ओबीसी सूची में अधिसूचना जारी करने सहित कई मांगों को लेकर निखिल विष्णुप्रिया मणिपुरी महासभा, निखिल विष्णुप्रिया मणिपुरी छात्र परिषद और विष्णुप्रिया मणिपुरी गणसंघर्ष परिषद के पदाधिकारियों ने आमरण अनशन शुरू किया था।
इस आंदोलन का नेतृत्व महासभा के अध्यक्ष अनिल राजकुमार, कार्यकारी महासचिव गोपीदास सिन्हा, रथींद्र कुमार सिन्हा और संगठनात्मक सचिव जितेंद्र कुमार सिन्हा ने किया। आंदोलन में सौ से अधिक महिला-पुरुष सदस्य शामिल हुए।
इस अवसर पर गोपीदास सिन्हा ने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 350-ए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार प्रत्येक भाषाई अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी मातृभाषा में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। बावजूद इसके, विष्णुप्रिया मणिपुरी भाषा को अब तक केवल एक विषय के रूप में सीमित रखा गया है, जबकि इसे पूर्ण शिक्षण माध्यम का दर्जा मिलना चाहिए।
उन्होंने बताया कि 1992 से 7-8 वर्षों तक चले तीव्र आंदोलन और शहीद सुदेष्णा की बलिदान के बाद 25 मई 1999 को सरकार ने केवल भाषा विषय के रूप में इसे लागू किया, जो वर्तमान में बराक घाटी के तीन जिलों के 149 प्राथमिक विद्यालयों तक सीमित है।
गोपीदास सिन्हा ने कहा कि 17 फरवरी 2022 को प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा माध्यम के रूप में लागू करने संबंधी विस्तृत रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपी गई थी। इसके बाद 2 मार्च 2023 को तत्कालीन पाथरकांदी विधायक (वर्तमान मंत्री) ने मुख्यमंत्री से कैबिनेट निर्णय लेने का अनुरोध किया, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत राभा, मिछिंग, देउरी, तिवा, कार्बी और डिमासा जैसी छह भाषाओं को शिक्षण माध्यम बनाया गया, लेकिन विष्णुप्रिया मणिपुरी भाषा को इससे वंचित रखा गया, जो स्पष्ट भेदभाव है।
आंदोलनकारियों ने बताया कि 2015 से विष्णुप्रिया भाषा शिक्षकों के 300 पद सृजन की मांग भी लंबित है। विशेष टीईटी व्यवस्था की मांग पर भी शिक्षा विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया।
आंदोलनकारियों ने सरकार से अपील की कि विष्णुप्रिया भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं विकास के लिए इसे प्राथमिक स्तर पर शिक्षण माध्यम के रूप में शीघ्र लागू किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रशासन से शीघ्र संवाद कर समाधान निकालने की भी मांग की।