भोलागिरि आश्रम में धूमधाम से मना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व नंदोत्सव

दो दिवसीय धार्मिक आयोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, भक्ति और उल्लास से सराबोर रहा आश्रम परिसर

शिलचर, 6 सितंबर। रांगीरखाड़ी स्थित भोलागिरि आश्रम में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी शुक्रवार और शनिवार को दो दिवसीय श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं नंदोत्सव धार्मिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। सनातन धर्म की परंपराओं एवं धार्मिक विधि-विधानों के अनुसार आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

शुक्रवार शाम से श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उपवास रखा और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में लीन रहे। अगले दिन शनिवार को विधिवत पारण के साथ नंदोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान आश्रम परिसर भक्ति, आध्यात्मिक वातावरण और उत्सव के उल्लास से भर उठा।

आश्रम के अध्यक्ष श्रीमत् स्वामी भुवनेश्वरानंद गिरि महाराज के पौरोहित्य में आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम को पुरोहित हीरक भट्टाचार्य, रूपम देव राय, रूमा देवराय, भोलानाथ चौधरी, सौमेन दत्त चौधरी, पंकज दे, सुशांत सेन, सुमित पाल, कुटन दास, छाया दास, वेदवती दास दे, छंदा देव, दीपली चौधरी, मित्रा दत्त सहित अन्य श्रद्धालुओं एवं सेवाभावी कार्यकर्ताओं के सहयोग से व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया गया।

नंदोत्सव की धार्मिक परंपरा

इस अवसर पर श्रीमत् स्वामी भुवनेश्वरानंद गिरि महाराज ने नंदोत्सव की धार्मिक पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद कंस के अत्याचार से उनकी रक्षा के लिए वसुदेव उन्हें गोकुल ले गए और नंद-यशोदा के संरक्षण में सौंप दिया। नंद के घर कृष्ण के पहुंचने की खबर से पूरा गोकुल आनंद में डूब गया।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अगले दिन पालक पिता नंद द्वारा गोकुलवासियों के साथ मनाए गए इसी आनंदोत्सव की स्मृति में नंदोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। इसी धार्मिक परंपरा का निर्वहन करते हुए भोलागिरि आश्रम में भी जन्माष्टमी के अगले दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ नंदोत्सव आयोजित किया गया।

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