बाढ़ प्रभावित नजीरा में अब्सू (ABSU) का 9 दिवसीय ‘मिशन होम रेस्क्यू एंड रिस्टोर’ संपन्न,

बाढ़ प्रभावित नजीरा में अब्सू (ABSU) का 9 दिवसीय ‘मिशन होम रेस्क्यू एंड रिस्टोर’ संपन्न, 209 घरों का किया पुनर्वास

​• 15 जिलों के 150 स्वयंसेवकों ने 9 प्रभावित गांवों में कीचड़ हटाकर घरों की मरम्मत की

​• 60 जरूरतमंद छात्रों को बांटी गई पाठ्य सामग्री; सरकार से 6 महीने के मुफ्त राशन और स्थायी समाधान की मांग

कोकराझार  22 अगस्त 2026:

असम के शिवसागर जिले के अंतर्गत नजीरा राजस्व चक्र (रेवेन्यू सर्कल) में पिछले महीने आई भीषण बाढ़ और गाद (सिल्ट) से मची तबाही के बाद ऑल बोडो स्टूडेंट्स यूनियन (ABSU) द्वारा चलाया गया 9 दिवसीय विशेष राहत व पुनर्वास अभियान ‘मिशन होम रेस्क्यू एंड रिस्टोर’ शनिवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 14 अगस्त से 22 अगस्त तक चले इस सघन जमीनी अभियान में केंद्रीय समिति के नेतृत्व में राज्य के 15 जिलों से आए 150 समर्पित स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।  

​स्वतंत्रता दिवस पर हुई थी जमीनी कार्य की शुरुआत

​अभियान की रूपरेखा 14 अगस्त को रोहदोई पुखुरी में केंद्रीय बेस कैंप की स्थापना के साथ तय की गई थी। 15 अगस्त को देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर रोहदोई पुखुरी एम.ई. स्कूल में राष्ट्रीय ध्वजारोहण और बेस कैंप पर अब्सू अध्यक्ष ख्वरुमदाओ वारी (Kwrwmdao Wary) द्वारा संगठन का ध्वज फहराकर राहत कार्यों की विधिवत शुरुआत की गई।  

​209 घरों की मरम्मत और गाद हटाने का काम पूरा

​बीते 19 जुलाई को आई प्रलयंकारी बाढ़ के कारण घरों में भारी मात्रा में गाद व कीचड़ जमा हो गया था। 9 दिनों के इस अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने कुल 209 प्रभावित परिवारों के घरों से गाद निकालने, संरचनात्मक मरम्मत करने और मलबे में दबे जरूरी घरेलू सामानों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम किया।  

​इस अभियान के तहत सबसे अधिक प्रभावित 9 गांवों—माजगांव, संतोक बाजार, पर्जाबस्ती, बोर-मिशिंग गांव, बिहुबोर हिलातोल, सोनापुर नगर, नेपाली खूटी, बालिजान और सैतिंग कैती को कवर किया गया।  

​प्रभावित छात्रों को बांटी गई पठन सामग्री

​बाढ़ के चलते बच्चों की पढ़ाई में आए व्यवधान को देखते हुए संगठन ने संवेदनशील पहल की। विभिन्न गांवों से 60 सबसे अधिक प्रभावित छात्र-छात्राओं की पहचान कर उन्हें नोटबुक और स्टेशनरी किट वितरित किए गए, ताकि वे पुनः अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू कर सकें।  

​15 विशेष टीमों में बांटे गए थे स्वयंसेवक

​राहत कार्य को अनुशासित और प्रभावी बनाने के लिए 150 स्वयंसेवकों को 15 विशेष टीमों (10 फील्ड ऑपरेशनल टीमें और 5 लॉजिस्टिक्स/सपोर्ट टीमें) में विभाजित किया गया था। ऐतिहासिक विभूतियों और प्रतीकों के नाम पर गठित इन टीमों में भोजन निर्माण, सर्वे, सामग्री आपूर्ति और मीडिया प्रबंधन की अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।  

​सरकार से 6 महीने के राशन और दिखौ नदी के स्थायी प्रबंधन की मांग

​अभियान के समापन पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अब्सू के अध्यक्ष ख्वरुमदाओ वारी ने कहा,

​”हमारे स्वयंसेवकों ने विपरीत परिस्थितियों में अथक परिश्रम कर 209 घरों को फिर से रहने योग्य बनाया है। लेकिन तबाही का पैमाना इतना बड़ा है कि केवल सामाजिक संगठनों के प्रयासों से पूर्ण पुनर्वास संभव नहीं है। फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं और हजारों लोगों के सामने आजीविका का संकट है। हम राज्य और केंद्र सरकार से तत्काल त्वरित पुनर्निर्माण योजनाएं लागू करने, प्रभावितों को कम से कम 6 महीने का मुफ्त राशन मुहैया कराने और भविष्य में ऐसी आपदा रोकने के लिए दिखौ (Dikhow) नदी के निचले इलाकों के उचित प्रबंधन की पुरजोर मांग करते हैं।’”

​स्थानीय प्रशासन व जनता का जताया आभार

​समापन अवसर पर अब्सू नेतृत्व ने रोहदोई पुखुरी एम.ई. स्कूल प्रबंधन, पातोरगांव के ग्राम प्रमुखों, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, दानदाताओं और दिन-रात सेवा में जुटे सभी स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया।  

GOPAL PRASAD

KOKRAJHAR , ASSAM

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