कोकराझार में एरी एवं मूगा रेशम किसानों को दिया गया कीट व रोग प्रबंधन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण

​कोकराझार (असम): ‘मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA) 2.0’ अभियान के तहत बीटीसी के दक्षिण मोरीगांव में एरी और मूगा रेशम किसानों के लिए एक दिवसीय विशेष वैज्ञानिक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों से जोड़कर रेशम उत्पादन और उनकी आय में वृद्धि करना था।

​प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय रेशम बोर्ड (के.रे.बो.) की मूगा एरी रेशमकीट बीज संगठन (MESSO) पी-3 इकाई, कोवाबिल की वैज्ञानिक-बी डॉ. सुरक्षा चनोत्रा तथा राज्य रेशम विभाग, कोकराझार की विस्तार अधिकारी श्रीमती कल्पोजिता बसुमतारी के नेतृत्व में किया गया।

​’करके सीखने’ की पद्धति पर रहा जोर

​शिविर में केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहकर ‘करके सीखने’ (लर्निंग बाय डूइंग) की पद्धति पर विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु:

​कीटाणुशोधन और स्वच्छता: रेशमकीट पालन गृह और उपकरणों को रोगाणुमुक्त रखने के लिए सही सांद्रता में कीटाणुनाशक घोल तैयार करने और उसके उपयोग की विधि समझाई गई।

​पैडल स्प्रेयर का लाइव डेमो: मेजबान पौधों (होस्ट प्लांट्स) पर सुरक्षात्मक घोल के प्रभावी छिड़काव हेतु किसानों को पैडल संचालित स्प्रेयर का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया गया।

​शुरुआती निगरानी: पत्तों और कीटों में रोग के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान, समय पर निगरानी तथा निवारक उपायों पर तकनीकी मार्गदर्शन दिया गया।

​विशेषज्ञों ने बताया कि कीटों और रोगों से बचाव कर फसल नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है, जिससे गुणवत्तापूर्ण कोकून का उत्पादन संभव होगा। इस प्रशिक्षण से क्षेत्र के रेशम पालकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा और उनकी आजीविका सशक्त होगी।

GOPAL PRASAD

KOKRAJHAR , ASSAM

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