बरम बाबा तीर्थस्थल के विकास को नई दिशा देंगे
ओम प्रकाश सिंह, बोले- “ऐसा काम करेंगे जिसे लोग वर्षों तक याद रखेंगे”
अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार खुलकर बोले शिलकुड़ी-बिक्रमपुर चाय बागान के महाप्रबंधक, तीर्थस्थल विकास, चाय उद्योग और भूमि विवादों पर रखी अपनी बात
शिवकुमार, शिलकुड़ी (कछार), 05 जून।
बराक घाटी के सुप्रसिद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक आस्था केंद्र बरम बाबा तीर्थस्थल के विकास को लेकर नई उम्मीदों का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में बरम बाबा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष चुने गए शिलकुड़ी एवं बिक्रमपुर चाय बागान के महाप्रबंधक ओम प्रकाश सिंह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में तीर्थस्थल के विकास, श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार और मेले के बेहतर प्रबंधन के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।
प्रेरणा भारती डिजिटल न्यूज नेटवर्क को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ओम प्रकाश सिंह ने अपने लंबे प्रशासनिक अनुभव, बरम बाबा तीर्थस्थल के भविष्य, शिलकुड़ी चाय बागान की वर्तमान स्थिति और भूमि विवाद जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
बराक घाटी की आस्था का प्रमुख केंद्र है बरम बाबा
बरम बाबा तीर्थस्थल बराक घाटी के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यहां स्थित नौ मंदिर और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला विशाल धार्मिक मेला वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। असम के विभिन्न जिलों के अलावा पड़ोसी राज्यों और अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
हाल ही में मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष चुने गए ओम प्रकाश सिंह का मानना है कि यह केवल एक मंदिर परिसर नहीं बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक पहचान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर को और अधिक विकसित करने की आवश्यकता है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
37 वर्षों का अनुभव, चाय उद्योग में लंबा सफर
अपने परिचय में ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि वे लगभग 37 वर्षों से चाय उद्योग से जुड़े हुए हैं। उन्होंने असम के कई प्रमुख चाय क्षेत्रों में कार्य किया है। गोलाघाट, नौगांव और अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बाद उनका स्थानांतरण कछार जिले में हुआ।
उन्होंने बताया कि कछार क्षेत्र से उनका पुराना संबंध रहा है और यहां के सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश को वे भलीभांति समझते हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व उन्होंने शिलकुड़ी एवं बिक्रमपुर चाय बागानों में समूह महाप्रबंधक के रूप में कार्यभार संभाला था।
सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से होगा विकास
बरम बाबा तीर्थस्थल के विकास को लेकर अपनी योजनाओं का खुलासा करते हुए ओम प्रकाश सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के स्तर पर विकास कार्यों के लिए सहायता राशि की घोषणा की गई है। यदि यह राशि उपलब्ध होती है तो मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य शुरू किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि सबसे पहले मंदिर परिसर में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता, आवागमन और सुरक्षा से जुड़े कार्य प्राथमिकता में रहेंगे।
पुजारियों के लिए आवासीय कॉलोनी बनाने की योजना
ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि मंदिर से जुड़े पुजारियों और धार्मिक गतिविधियों में योगदान देने वाले लोगों के लिए बेहतर आवासीय व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में पुजारियों के लिए एक व्यवस्थित आवासीय कॉलोनी बनाने की योजना है, जिससे धार्मिक गतिविधियों का संचालन और अधिक सुचारू रूप से हो सके।
कार्तिक पूर्णिमा मेले को मिलेगा नया स्वरूप
हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगने वाला बरम बाबा मेला बराक घाटी के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के कारण कई बार स्थान और सुविधाओं की कमी महसूस होती है।
इस विषय पर बोलते हुए ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि मेले के दौरान बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए परिसर के विस्तार और बेहतर प्रबंधन पर विचार किया जाएगा। समिति के अन्य सदस्यों और स्थानीय लोगों के साथ चर्चा कर ऐसी योजनाएं बनाई जाएंगी जिनसे श्रद्धालुओं को अधिक सुविधा मिल सके।
उन्होंने कहा कि मेले को भविष्य में और अधिक व्यवस्थित तथा आकर्षक बनाने का प्रयास किया जाएगा ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी सकारात्मक अनुभव प्राप्त हो।
मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान
अध्यक्ष बनने के बाद ओम प्रकाश सिंह ने मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि परिसर के आसपास उपलब्ध स्थानों को विकसित करने, साफ-सफाई की व्यवस्था मजबूत करने तथा श्रद्धालुओं के बैठने और विश्राम की सुविधाएं बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है।
उनका मानना है कि धार्मिक स्थल के विकास के साथ-साथ उसकी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखना आवश्यक है।
“काम ऐसा होगा जिसे लोग याद रखेंगे”
साक्षात्कार के दौरान ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि वे केवल पद संभालने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि ऐसा काम करना चाहते हैं जिससे क्षेत्र के लोगों को वास्तविक लाभ मिले।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का मूल्यांकन जनता स्वयं करेगी, लेकिन उनका प्रयास रहेगा कि बरम बाबा तीर्थस्थल के लिए ऐसे कार्य किए जाएं जिन्हें आने वाले वर्षों तक याद रखा जाए।
चाय उद्योग कठिन दौर से गुजर रहा
चाय उद्योग की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज पूरा उद्योग कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। उत्पादन लागत बढ़ रही है जबकि बाजार की परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं रहतीं।
इसके बावजूद उन्होंने विश्वास जताया कि सही प्रबंधन और योजनाबद्ध प्रयासों के माध्यम से बागानों को बेहतर स्थिति में लाया जा सकता है।
गुणवत्ता के लिए आज भी प्रसिद्ध है शिलकुड़ी चाय बागान
ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि शिलकुड़ी चाय बागान लंबे समय से अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए जाना जाता रहा है। वर्तमान प्रबंधन भी उसी प्रतिष्ठा को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है।
उन्होंने बताया कि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों क्षेत्रों में सुधार के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।
भूमि विवादों पर भी रखी अपनी बात
हाल के समय में शिलकुड़ी चाय बागान की भूमि को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं और विवाद सामने आए हैं। इस संबंध में पूछे गए प्रश्न पर ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि कई मामले पूर्व प्रबंधन के कार्यकाल से जुड़े हुए हैं और संबंधित एजेंसियों द्वारा उनकी जांच की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य कंपनी की संपत्तियों का संरक्षण, उत्पादक भूमि का विकास और बागान के हितों की रक्षा करना है। प्रबंधन का पूरा ध्यान चाय उत्पादन और श्रमिकों के हितों पर केंद्रित है।
क्षेत्र के विकास को लेकर बढ़ी उम्मीदें
बरम बाबा मंदिर संचालन समिति के अध्यक्ष के रूप में ओम प्रकाश सिंह की नियुक्ति के बाद क्षेत्र के लोगों में विकास को लेकर नई उम्मीदें दिखाई दे रही हैं। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि उनके प्रशासनिक अनुभव का लाभ मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र के विकास में मिलेगा।
यदि प्रस्तावित योजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो आने वाले वर्षों में बरम बाबा तीर्थस्थल न केवल बराक घाटी बल्कि पूरे असम के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में अपनी एक नई पहचान स्थापित कर सकता है।