प्राचीन एवं ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता और बढ़ गई है जाने…

प्राचीन एवं ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर की भव्यता और बढ़ गई है जाने…
– अतनु दास, वरिष्ठ पत्रकार

नई दिल्ली-वाराणसी: ऐतिहासिक दस्तावेजों और औपनिवेशिक काल की पुरानी काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी का संक्षिप्त इतिहास और विवरण के अध्ययन के बाद अभी पिछले महीने की यात्रा के मुताबिक़ जो संक्षिप्त ऐतिहासिक विवरण और जानकारी आप के लिए जुटा पाया है के अनुसार इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मंदिर की पृष्ठभूमि इस प्रकार है।इतिहाससाहित्यिक स्रोतों एवं पुराने गजेटियर्स के अनुसार, इस मंदिर पर कई बार हमले हुए और इसका पुनर्निर्माण किया गया:प्रथम निर्माण व प्राचीन इतिहास: स्कंद पुराण के ‘काशी खंड’ में इस ज्योतिर्लिंग का वर्णन मिलता है. इतिहासकारों के अनुसार, 11वीं सदी में राजा हरिश्चंद्र ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था.पहला बड़ा विध्वंस (1194 ईस्वी): कुतुबुद्दीन ऐबक और मुहम्मद गोरी की सेना ने वाराणसी पर आक्रमण कर इस भव्य मंदिर को भारी नुकसान पहुँचाया।
इसके बाद स्थानीय लोगों और राजाओं द्वारा इसका पुनः निर्माण कराया गया.दूसरा विध्वंस (1447 ईस्वी): जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह शर्की के शासनकाल में मंदिर को एक बार फिर तोड़ा गया.अकबर और राजा टोडरमल का काल (1585 ईस्वी): मुगल सम्राट अकबर के राजस्व मंत्री राजा टोडरमल ने प्रसिद्ध विद्वान नारायण भट्ट के सहयोग से मंदिर का अत्यंत भव्य और विशाल पुनर्निर्माण करवाया ।
औरंगज़ेब का आक्रमण (1669 ईस्वी): मुगल शासक औरंगज़ेब के आदेश पर इस मुख्य मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया और उसके एक हिस्से पर ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण कराया गया।वर्तमान मंदिर का निर्माण (1780 ईस्वी)पुरानी आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, वर्तमान मंदिर का निर्माण मूल स्थान के ठीक बगल में इंदौर की मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा सन 1780 में कराया गया था।
स्वर्ण शिखर: इसके बाद सन 1835 में, पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखरों को मढ़ने के लिए लगभग 1,000 किलोग्राम शुद्ध सोना दान किया था, जिससे इसे ‘गोल्डन टेम्पल’ भी कहा जाने लगा।औपनिवेशिक काल की रिपोर्ट्स (औपचारिक विवरण)19वीं सदी के ब्रिटिश अधिकारियों और शोधकर्ताओं जैसे जेम्स प्रिंसिप (James Prinsep) और एडविन ग्रीव्स (Edwin Greaves) की पुरानी रिपोर्टों में काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला और बनारस की संकरी गलियों (विश्वनाथ गली) का सजीव वर्णन मिलता है:भौगोलिक स्थिति: यह मंदिर वाराणसी में पवित्र गंगा नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है.धार्मिक महत्व: पुरानी रिपोर्टों में यह दर्ज है कि भारत के कोने-कोने से लाखों हिंदू श्रद्धालु अपने जीवनकाल में कम से कम एक बार यहाँ आकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन और गंगा स्नान करने की तीव्र इच्छा रखते हैं, जिसे ‘मोक्ष’ का साधन माना जाता है।सरकारी प्रबंधन (1983): ऐतिहासिक रूप से काशी नरेश (बनारस के महाराजा) इस मंदिर का प्रबंधन देखते थे। हालांकि, पुरानी प्रशासनिक रिपोर्टों के अनुसार 28 जनवरी 1983 को उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मंदिर का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया।
अब यह ऐतिहासिक प्राचीन शहर भारतवर्ष के लगातार तीसरी बार चुने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का संसदीय क्षेत्र है।
वर्तमान प्रधानमंत्री का संसदीय होने के कारण इस शहर का उल्लेखनीय ढंग से आधुनिकीकरण कराया गया है। इसके तहत काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन हेतु श्रध्दालुओं के लिए अति उत्तम पृथक कॉरिडोर का निर्माण किया गया है।
बिजली पानी के उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया है।
टूटे फूटे सड़कों को अति सुंदर रूप दिया गया।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गंगा नदी में नौकायन की अत्याधुनिक व्यवस्था की गई है।
प्रसिद्ध गंगा घाटों पर रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ साथ रोज़ाना मनोरम आरती भी की जाती है।

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