पूर्वोत्तर भारत से संवैधानिक गलियारों तक: एक युवा लेखक की साहित्यिक यात्रा

सिलचर (असम)। -हिमांशु बोरा

पूर्वोत्तर भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक, भाषाई और साहित्यिक विरासत के लिए देशभर में विशिष्ट पहचान रखता है। आठ राज्यों—असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा—से मिलकर बने इस क्षेत्र में 220 से अधिक भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। यही भूमि भारतीय साहित्य को बीरेन्द्र कुमार भट्टाचार्य, ममांग दाई, टेमसुला आओ, ईस्टरीन किरे और रॉबिन एस. नंगोम जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकार दे चुकी है। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर पूर्वोत्तर भारत के युवा लेखकों की उपस्थिति अपेक्षाकृत सीमित रही है।

इसी पृष्ठभूमि में असम के सिलचर निवासी बिनीत कुमार सिंह की साहित्यिक यात्रा उल्लेखनीय बनकर उभरी है।

सिलचर निवासी बिनीत कुमार सिंह, श्री बिनय कुमार सिंह एवं श्रीमती पिंकी सिंह के सुपुत्र हैं। वे समाजसेवी एवं राजनीतिक व्यक्तित्व श्री अवधेश कुमार सिंह तथा श्रीमती पुष्पा सिंह के पौत्र हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि और साहित्य के प्रति प्रारंभिक रुचि ने उनकी लेखकीय यात्रा को आकार दिया, जो आज उन्हें पूर्वोत्तर भारत के उभरते युवा लेखकों में स्थान दिला रही है।

वर्तमान में नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (एनईएचयू), शिलांग के इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (बी.ए.-बी.एड.) के छात्र बिनीत कुमार सिंह ने कम आयु में ही पौराणिक, ऐतिहासिक, हॉरर और समकालीन कथा साहित्य की कई पुस्तकें लिखी हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में Ravana: The Trilok Vijayta, The Adventures of Rudra Roy, Princess Atheana, Pale Shadows, With You, Always तथा Kakbhushundi: Chronicles of Two Epics शामिल हैं।

हाल के महीनों में उनकी साहित्यिक यात्रा ने तब विशेष पहचान प्राप्त की, जब उन्हें पूर्वोत्तर भारत के तीन राजभवनों में अपनी पुस्तकें भेंट करने और साहित्यिक संवाद के लिए आधिकारिक रूप से आमंत्रित किया गया।

उनका पहला औपचारिक साहित्यिक कार्यक्रम अरुणाचल प्रदेश राजभवन में आयोजित हुआ, जहाँ उन्होंने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के. टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) को अपनी पुस्तकें भेंट कीं। इस अवसर के बाद राज्यपाल ने उन्हें आधिकारिक ‘लेटर ऑफ एप्रिसिएशन’ प्रदान करते हुए उन्हें “उभरते हुए लेखक, साहित्यिक योगदानकर्ता एवं छात्र” बताया। अपने पत्र में राज्यपाल ने उनकी समकालीन भारतीय साहित्य में उल्लेखनीय भूमिका, शैक्षणिक उत्कृष्टता और रचनात्मक प्रतिभा के संतुलन, तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उनके प्रयासों की सराहना की।

इसके बाद बिनीत कुमार सिंह ने सिक्किम राजभवन में राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर से शिष्टाचार भेंट कर अपनी पुस्तकें भेंट कीं। साहित्य, युवाओं और पठन संस्कृति पर हुई चर्चा ने उनकी साहित्यिक यात्रा को एक नया आयाम दिया।

उनकी तीसरी आधिकारिक साहित्यिक प्रस्तुति त्रिपुरा राजभवन में हुई, जहाँ उन्होंने आधिकारिक आमंत्रण पर राज्यपाल को अपनी पुस्तकें भेंट कीं। इस प्रकार वे पूर्वोत्तर भारत के तीन राजभवनों में अपनी साहित्यिक कृतियाँ प्रस्तुत करने वाले चुनिंदा युवा लेखकों में शामिल हुए।

बिनीत कुमार सिंह की साहित्यिक यात्रा को एक और महत्वपूर्ण पहचान तब मिली, जब प्रख्यात लेखक, पूर्व संयुक्त राष्ट्र अवर महासचिव एवं तिरुवनंतपुरम से सांसद डॉ. शशि थरूर ने उनकी पुस्तक With You, Always पर उन्हें आधिकारिक प्रशंसा-पत्र भेजा। 13 मार्च 2026 को लिखे अपने पत्र में डॉ. थरूर ने कहा, “मैं आपके लेखन के प्रति जुनून की सराहना करता हूँ और आपकी पुस्तक ‘With You, Always’ की सफलता के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस युग में भी लेखन मानवीय पहचान की एक सशक्त अभिव्यक्ति बना हुआ है।” देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार और सांसद से प्राप्त यह प्रशंसा-पत्र उनकी साहित्यिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

इन उपलब्धियों के समानांतर बिनीत अपनी उच्च शिक्षा भी जारी रखे हुए हैं। उनकी रचनाओं में भारतीय दर्शन, पौराणिक परंपराएँ, लोककथाएँ तथा पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक विरासत की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।

ऐसे समय में जब साहित्यिक सफलता का आकलन अक्सर केवल पुरस्कारों या बिक्री के आँकड़ों से किया जाता है, बिनीत कुमार सिंह की यात्रा यह दर्शाती है कि साहित्य संवैधानिक संस्थाओं, शिक्षण संस्थानों और समाज के बीच सार्थक संवाद का माध्यम भी बन सकता है।

पूर्वोत्तर भारत की साहित्यिक परंपरा सदियों पुरानी है। आज उसी परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुँचाने वाले युवा रचनाकारों में बिनीत कुमार सिंह का नाम भी जुड़ता दिखाई दे रहा है। उनकी यात्रा केवल एक लेखक की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की उभरती साहित्यिक पहचान और उसके राष्ट्रीय विस्तार की कहानी भी है।

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