क्या शिक्षा का मंदिर भ्रष्टाचार का अड्डा बनता जा रहा है?
पीएम श्री स्कूल बना “हतश्री” स्कूल, काछाड़ के बिहाड़ा स्थित युधिष्ठिर साहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में गंभीर अनियमितताओं का आरोप
काठीघोड़ा, (काछाड़) 31 दिसंबर:
क्या समाज को दिशा देने वाला शिक्षा का मंदिर आज राजनीति और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है? काछाड़ जिले के ऐतिहासिक काठीघोड़ा क्षेत्र स्थित पीएम श्री युधिष्ठिर साहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय को लेकर उठे गंभीर आरोपों ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने विद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा से हस्तक्षेप की मांग की है।
सोमवार देर रात विद्यालय भवन निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोग उस समय भड़क उठे, जब अंधेरे में बिना सूचना-फलक लगाए निर्माण का अधूरा व संदिग्ध कार्य किया जा रहा था। विरोध के दौरान एक के बाद एक कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ, जिससे स्थिति “केचुआ खोदने पर सांप निकलने” जैसी बन गई।
अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में वर्षों से स्थायी प्रधानाचार्य की नियुक्ति नहीं की गई है। वर्तमान में विज्ञान शिक्षक निरूपम नाथ को अकादमिक इंचार्ज का दायित्व सौंपकर विद्यालय चलाया जा रहा है, जबकि उनसे वरिष्ठ और अधिक योग्य शिक्षक मौजूद होने के बावजूद न तो उन्हें यह जिम्मेदारी दी जा रही है और न ही किसी को प्रधानाचार्य पद पर बैठाया जा रहा है।
यह भी आरोप लगाया गया कि प्रधानाचार्य पद के लिए कई बार सरकारी स्तर पर स्वीकृति मिलने के बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते रातों-रात नियुक्ति रद्द कर दी जाती है। कभी काठीघोड़ा के विधायक खलील उद्दीन मजूमदार, तो कभी उत्तर करीमगंज के विधायक कमलाक्ष पुरकायस्थ का नाम लेकर शिक्षा मंत्री रणोज पेगु तक पहुंच बनाकर प्रधानाचार्य की कुर्सी खाली रखने की “तालीम” दी जा रही है। इस पूरे मामले में स्थानीय विधायक की भूमिका को भी पूरी तरह निष्क्रिय बताया जा रहा है।
अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में हो रही अनियमितताओं के बारे में बहुत से लोग जानते हैं, लेकिन डर के कारण खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं। आरोप है कि कुछ राजनीतिक नेता, सूदखोर और समाज के असामाजिक तत्वों से “मैनेज” कर विद्यालय को भ्रष्टाचार का गढ़ बना दिया गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि समाज को प्रकाश देने वाला शिक्षा संस्थान आखिर किनके नेतृत्व में राजनीति और भ्रष्टाचार का अखाड़ा बन गया? किसके हित में विद्यालय के छात्र एक स्थायी प्रधानाचार्य जैसे अभिभावक स्वरूप नेतृत्व से वंचित हैं? जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लेकर विद्यालय प्रबंधन समिति की भूमिका क्या है?
अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय में राजनीतिक रस्साकशी चल रही है, जिसका सीधा असर शैक्षणिक माहौल और परिणामों पर पड़ रहा है। विद्यालय का शैक्षणिक स्तर गिरता जा रहा है, वातावरण दूषित हो चुका है और सरकारी भवन निर्माण सहित हर कार्य में अनियमितताओं की छाया दिखाई दे रही है।
इतना ही नहीं, यह भी गंभीर आरोप सामने आया है कि विद्यालय के कुछ स्थानीय शिक्षक, जो सरकारी वेतन लेते हैं, अपने ही बच्चों को इस विद्यालय में न पढ़ाकर निजी स्कूलों में भेज रहे हैं, जो व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन और सरकार इस पूरे मामले में क्या कदम उठाती है, और क्या शिक्षा का यह मंदिर दोबारा अपने मूल उद्देश्य—ज्ञान, अनुशासन और नैतिकता—की ओर लौट पाएगा या नहीं।