पद्मश्री से सम्मानित कविंद्र पुरकायस्थ की स्मृति में भावपूर्ण ‘पद्मश्री गौरव उत्सव’

शिलचर से रानू दत्त की रिपोर्ट

शिलचर। मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान से अलंकृत शिक्षाविद्, समाजसेवी और जननेता कविंद्र पुरकायस्थ की स्मृति में शिलचर में भावपूर्ण ‘पद्मश्री गौरव उत्सव’ का आयोजन किया गया। सर्किट हाउस रोड स्थित समारोह भवन में आयोजित कार्यक्रम में राजनीति, शिक्षा, समाजसेवा और सांस्कृतिक जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों ने हिस्सा लेकर महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम में राज्य के मंत्री कौशिक राय, सांसद परिमल शुक्लवैद्य, विधायक डॉ. राजदीप राय, अमिय कांति दास, किशोर नाथ, पूर्व विधायक दीपायन चक्रवर्ती तथा राज्यसभा सांसद कनाद पुरकायस्थ सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। नृत्यांगना सिमरन साहा की गणेश वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

स्वागत भाषण में राज्यसभा सांसद कनाद पुरकायस्थ ने कहा कि पद्मश्री सम्मान केवल उनके परिवार का गौरव नहीं, बल्कि कविंद्र पुरकायस्थ के आदर्शों से प्रेरित प्रत्येक व्यक्ति का सम्मान है। उन्होंने अपने पिता की कर्मनिष्ठा, मानवीय संवेदनशीलता और क्षमाशील स्वभाव को याद करते हुए कहा कि मानव कल्याण के लिए कार्य करना ही उनके जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य था।

उन्होंने कबीर के दोहे के भाव का उल्लेख करते हुए कहा— “पद तुम्हारी पहचान नहीं है, बल्कि तुम पद की पहचान हो।”

कार्यक्रम के दौरान कविंद्र पुरकायस्थ के जीवन, उनके सामाजिक योगदान और जनसेवा से जुड़ी गतिविधियों पर आधारित एक वृत्तचित्र भी प्रदर्शित किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट शिक्षाविद् डॉ. अमलेंदु भट्टाचार्य, रवींद्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. मानवेंद्र दत्त चौधरी तथा समाजसेवी महावीर प्रसाद जैन ने अपने वक्तव्यों में कविंद्र पुरकायस्थ के शिक्षक जीवन, संगठनात्मक दक्षता, ईमानदारी और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान को याद किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत सुब्रत राय के निर्देशन में प्रस्तुत नाटक ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं गार्गी चक्रवर्ती, रथींद्र चक्रवर्ती, कौस्तव पुरकायस्थ और देबांजना भट्टाचार्य के संगीत प्रस्तुतियों ने समारोह को और भी यादगार बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन मंजुषा पुरकायस्थ और मनोज देव ने किया। अंत में कुनाल पुरकायस्थ ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि कविंद्र पुरकायस्थ का कर्ममय जीवन, मानवीय मूल्य और समाजसेवा की भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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