धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर हिमंत बिस्व सरमा बोले—इतिहास उन्हें सकारात्मक रूप से याद करेगा

गुवाहाटी, 26 जुलाई। NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पिछले दिनों देशभर में जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा सौंपे जाने पर असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि इस्तीफा देना धर्मेंद्र प्रधान का व्यक्तिगत निर्णय है। हालांकि, उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में असम के लिए प्रधान के योगदान की सराहना की।

मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने असम के लिए बहुत महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनके नेतृत्व में राज्य को भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) मिला और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि इतिहास धर्मेंद्र प्रधान के कार्यों का सकारात्मक मूल्यांकन करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान को भारत में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने और देश की शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक प्रभावों से मुक्त करने की दिशा में कार्य करने वाले व्यक्ति के रूप में याद किया जाएगा।

इधर, इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि पिछले दस दिनों के घटनाक्रम से उनका मन अत्यंत व्यथित और दुखी है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि राष्ट्रविरोधी ताकतें स्थिति का लाभ उठाएं या देश के युवाओं का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में उलझे।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में कहा कि वह पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका विश्वास है कि एक सशक्त, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है।

उन्होंने कहा कि NEET-UG परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं को सरकार ने गंभीरता से लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी। परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा आयोजित की गई तथा अगले वर्ष से इसे कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने का निर्णय लिया गया।

प्रधान ने कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों तथा जिला प्रशासन ने मिलकर कार्य किया। छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से पुनः परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही दिन इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि किसी भी मेधावी छात्र के साथ अन्याय न हो तथा परीक्षा माफिया के कारण किसी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले दस दिनों की घटनाओं से वे दुखी हैं। यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि देश की युवाशक्ति और विद्यार्थियों के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को भ्रम और विवाद के चक्र में फंसने से बचाना तथा उन्हें अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देना आवश्यक है।

अपने इस्तीफे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। साथ ही मंत्रिपरिषद के सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे भविष्य में भी भारत, ओडिशा तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहेंगे।

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