प्रीतम दास हाइलाकांदी, १५ जुलाई:
ऑल असम न्यायिक कर्मचारी संघ के आह्वान पर बुधवार से राज्यभर में दो दिवसीय पूर्ण हड़ताल शुरू हो गई है। १५ और १६ जुलाई को आयोजित इस आंदोलन के माध्यम से न्यायिक कर्मचारी अपनी लंबे समय से लंबित विभिन्न मांगों को पूरा करने की मांग कर रहे हैं।
संघ के अनुसार २६ दिसंबर २०२५ को डिब्रूगढ़ में आयोजित प्रथम वार्षिक आमसभा में चरणबद्ध असहयोग आंदोलन का निर्णय लिया गया था। उसी निर्णय के तहत प्रथम चरण के रूप में १५ एवं १६ जुलाई को दो दिवसीय पूर्ण हड़ताल की जा रही है।आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार प्रथम राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग (शेट्टी आयोग) की सिफारिशों का पूर्ण क्रियान्वयन, न्यायिक कर्मचारियों के लिए पृथक सेवा नियमावली का प्रकाशन पुराने जिला न्यायालयों में ग्रेड आधारित बेंच क्लर्क के पदों का सृजन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए २५ प्रतिशत पदोन्नति का प्रावधान, स्टेनोग्राफर चालक तथा रिकॉर्ड कीपरों को विशेष भत्ता लोक अदालत के कार्यों में नियुक्त कर्मचारियों को अतिरिक्त पारिश्रमिक ROP २०१७ के वेतनमान की विसंगतियों का निराकरण रिक्त पदों की शीघ्र भर्ती एवं पदोन्नति, यात्रा भत्ते में वृद्धि चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति तथा नई पेंशन योजना (NPS) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना (OPS) लागू करना शामिल है।संघ का आरोप है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई वर्ष पूर्व शेट्टी आयोग की सिफारिशों को लागू करने का निर्देश दिए जाने के बावजूद आज तक उनका पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त न्यायिक कर्मचारी प्रतिदिन निर्धारित समय से अधिक कार्य करने के बावजूद उनकी जायज़ मांगों और समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित प्राधिकारियों द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया हैआंदोलनकारियों का कहना है कि उन्होंने कई बार उच्च न्यायालय तथा संबंधित विभागों को ज्ञापन एवं आवेदन सौंपे लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने के कारण उन्हें विवश होकर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।संघ ने आम जनता को होने वाली अस्थायी असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए सभी से सहयोग और समर्थन की अपील की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी न्यायोचित मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक चरणबद्ध आंदोलन जारी रहेगा।