तिनसुकिया: असम के तिनसुकिया जिले में लोहित और ब्रह्मपुत्र नदियों के संगम पर गंभीर रूप से संकटग्रस्त घड़ियाल (Gavialis gangeticus) देखे जाने की पुष्टि हुई है। लोहित नदी में हाल के वर्षों में घड़ियाल की यह एक दुर्लभ उपस्थिति मानी जा रही है।
घड़ियाल को २५ सितंबर, २०२६ को एक रेत के टापू पर धूप सेंकते हुए कैमरे में कैद किया गया। यह दृश्य सीड टू फॉरेस्ट फाउंडेशन, बालीपारा फाउंडेशन की टीम और स्थानीय समुदाय के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से किए गए जैव विविधता सर्वेक्षण के दौरान सामने आया। सर्वेक्षण का नेतृत्व मानस प्रतिम शर्मा और संदीप छेत्री ने किया।
यह घड़ियाल किसी संरक्षित क्षेत्र के भीतर नहीं, बल्कि डिब्रू-सैखोवा-ब्रह्मपुत्र के व्यापक नदी क्षेत्र के निकट देखा गया। संरक्षणवादियों के अनुसार, यह खोज दुर्लभ और संकटग्रस्त नदी-आधारित प्रजातियों की पहचान में समुदाय आधारित जैव विविधता निगरानी के महत्व को रेखांकित करती है।
सीड टू फॉरेस्ट फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य मानस प्रतिम शर्मा ने लोहित और ब्रह्मपुत्र नदी प्रणालियों में घड़ियाल के वर्तमान वितरण और आबादी की स्थिति का पता लगाने के लिए व्यवस्थित सर्वेक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
घड़ियाल को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया है। इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, १९७२ की अनुसूची-एक के तहत भी संरक्षण प्राप्त है। यह एक विशिष्ट मीठे पानी का मगरमच्छ है, जिसकी पहचान इसके लंबे और पतले थूथन से होती है।
आवासों में बदलाव, बांधों का निर्माण, बालू खनन, अवैध शिकार, अंडों का संग्रह और घोंसले बनाने वाले स्थलों पर मानवीय गतिविधियों के कारण घड़ियाल की आबादी में भारी गिरावट आई है।
असम में हाल के वर्षों में घड़ियाल देखे जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। वर्ष २०२२ में डिब्रू-सैखोवा राष्ट्रीय उद्यान के आसपास और मई २०२६ में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के निकट घड़ियाल देखे जाने के रिकॉर्ड मिले थे। इन घटनाओं से संकेत मिलता है कि ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली अब भी घड़ियाल के लिए उपयुक्त आवास उपलब्ध करा सकती है।
लोहित-ब्रह्मपुत्र संगम पर घड़ियाल के नवीनतम दर्शन के बाद संरक्षण विशेषज्ञों ने असम के नदी क्षेत्रों में आगे व्यापक सर्वेक्षण कराने की मांग की है, ताकि इस प्रजाति के वितरण, आबादी और आवास की मौजूदा स्थिति का आकलन किया जा सके।