तर्पण 

पितर पक्ष आया बरसे हैं पुरखों का आशीष,

तर्पण कर श्रद्धा से नतमस्तक चरणों में शीश,

हैं यह सोलह दिनों का श्रद्धेय त्यौहार विशेष,

पूर्वज आते देने अपना आशीर्वाद अशेष ।

मन के विषाद से मुक्त हो करें पवित्र प्रार्थना,

नेह आशीष से पितरों के फलीभूत कामना,

कर तर्पण कर्म वचन से सदा कीजिए आभार,

पितृजनों की कृपादृष्टि से फले-फूले परिवार ।

तिथि विशेष करते पूजन अर्चन तर्पण समर्पण,

भूल चूक की क्षमा याचना से कटे दुख बंधन,

 श्राद्धपक्ष में अमृत “आनंद” की बरसती बरखा, 

 देख परिवार को इकट्ठा पितरों का मन हरखा ।

पितरों का तर्पण प्रेम भावपूर्ण से हो सजदा,

इन पैतृक संस्कारों का मान रखें हम सर्वदा,

कोटि-कोटि वंदन पितरों को मार्ग न हो अवरूद्ध, 

गौ ग्रास और काग को थाली सेवा भाव शुद्ध ।

अंजुरी भरी जल की और मन का सुंदर दीपक,

शुभचिंतक परिवार के पितर पालक और रक्षक,

पितरों की संतुष्टि से बरसता वैभव घर द्वार,

पाया ये जीवन जिनसे नमन उन्हें बारम्बार ।

– मोनिका डागा “आनंद”, चेन्नई 

आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद 

रचना स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित

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