[साहित्यिक आदान-प्रदान से असम और पंजाब के बीच सांस्कृतिक संबंध हुए मजबूत; कविता पाठ और बोरगीत की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में लगाया चार चांद]
डिब्रूगढ़: साहित्य, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और मानवीय संवेदनाओं के उत्सव के रूप में डीएचएसके कॉलेज (स्वायत्त) के श्रीमंत शंकरदेव सभागार में आयोजित एक विशेष काव्य कार्यक्रम में पंजाब के तीन प्रतिष्ठित कवियों—अमरजीत ग्रेवाल, योजना राजवत और स्वनजीत सावी—ने कॉलेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों के साथ आत्मीय संवाद किया।
इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन असम साहित्य सभा की अंतरराज्यीय विदेशी मैत्री उपसमिति, डीएचएसके कॉलेज के दिम्बेश्वर चलिहा बॉयज हॉस्टल तथा रुक्मिणी देवी कनोई गर्ल्स हॉस्टल द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ. शशिकांत सैकिया ने साहित्य और कविता की सार्वभौमिक प्रकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानवीय संवेदनाएं भौगोलिक और भाषाई सीमाओं से परे होती हैं। विद्यार्थियों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर देश के विभिन्न हिस्सों के साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक परंपराओं से भी परिचित होना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक संवाद आपसी समझ, सांस्कृतिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देते हैं तथा विद्यार्थियों को जीवन और समाज के प्रति नए दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
संवाद सत्र के दौरान पंजाब से आए कवियों ने अपनी साहित्यिक यात्रा, रचनात्मक प्रेरणाओं तथा कविता, जीवन और समाज के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने सामाजिक परिवर्तन, जनसंघर्ष, प्रकृति, प्रेम और समकालीन वास्तविकताओं को साहित्य में अभिव्यक्त करने की भूमिका पर भी चर्चा की।
प्रसिद्ध पंजाबी कवि अमरजीत ग्रेवाल ने कविता को मानव आत्मा की भाषा बताते हुए कहा कि एक कवि के आसपास की दुनिया उसकी रचनात्मक प्रेरणा का असीमित स्रोत होती है। उन्होंने असम की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत की सराहना की और विद्यार्थियों के साथ हुए संवाद को यादगार अनुभव बताया।
पंजाबी कवयित्री योजना राजवत ने संस्थान के सुंदर वातावरण की सराहना की तथा इस सार्थक कार्यक्रम के आयोजन के लिए कॉलेज प्रशासन के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कार्यक्रम में अनुशासित ढंग से भाग लेने और पूरे उत्साह के साथ सत्र का आनंद उठाने के लिए विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को डॉ. प्रणय फूकन, डॉ. शशिकांत सैकिया, तुलिका चेतिया येन, मिंटू दास, चिंटू समीर बोरगोहेन, जिंटू हजारिका और स्वाति चक्रवर्ती द्वारा प्रस्तुत कविता पाठ ने और भी समृद्ध बनाया।
वहीं, छात्रा रजमी मोरान की बोरगीत प्रस्तुति ने कार्यक्रम में असमिया सांस्कृतिक परंपरा की विशेष छटा बिखेरी।
कार्यक्रम का संचालन रुक्मिणी देवी कनोई गर्ल्स हॉस्टल की अधीक्षिका एवं कॉलेज की शिक्षिका करिश्मा जे. के. वैष्णवी ने किया।
इस अवसर पर कंप्यूटर विज्ञान विभाग के शिक्षक हरजिंदर सिंह, प्रख्यात कवि कुशल कोंवर, बैद्य ब्राइट बुरागोहेन, कॉलेज के कई शिक्षक तथा बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल के सौ से अधिक विद्यार्थी उपस्थित थे।
यह कार्यक्रम साहित्यिक संवाद और सांस्कृतिक मैत्री का एक यादगार मंच साबित हुआ, जिसने कविता की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से असम और पंजाब के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत किया।