[संघर्षपूर्ण जीवन से शिक्षा जगत की प्रतिष्ठित हस्ती बनने तक का सफर; शिक्षा, साहित्य, संस्थान निर्माण और समाजसेवा में उल्लेखनीय योगदान को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान]
डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ स्थित ऐतिहासिक डीएचएसके कॉलेज (स्वायत्त) के प्राचार्य डॉ. शशिकांत सैकिया की प्रेरणादायक जीवन यात्रा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित फोर्ब्स पत्रिका में स्थान मिला है। उनकी जीवनगाथा में कठिन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद्, संस्थान निर्माता, लेखक और समाजसेवी बनने तक के सफर को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
पत्रिका के २ अक्टूबर के अंक में प्रकाशित “कर्मसूर्य डॉ. शशिकांत सैकिया: विपरीत परिस्थितियों से संस्थान निर्माण तक” शीर्षक वाला लेख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समर्पित विशेष अंक का हिस्सा था। इसमें डॉ. सैकिया के संघर्ष, दृढ़ संकल्प तथा शिक्षा, साहित्य, पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा के क्षेत्र में उनके योगदान का विस्तृत उल्लेख किया गया है।
अपनी शिक्षा का खर्च जुटाने के लिए डॉ. सैकिया ने एक प्लाईवुड कारखाने में मजदूर के रूप में काम किया। इसके अलावा, वे साप्ताहिक बाजार के दिनों में सुपारी और पान की एक छोटी-सी दुकान भी चलाते थे। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय से पर्यटन विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
उन्होंने अपने शिक्षण करियर की शुरुआत दिसपुर कॉलेज से की और बाद में लगभग १७ वर्षों तक डिब्रू कॉलेज में सेवाएं दीं। माजुली कॉलेज के प्राचार्य के रूप में उन्होंने संस्थान के बुनियादी ढांचे, तकनीकी सुविधाओं और शैक्षणिक वातावरण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके योगदान के लिए उन्हें माजुली कॉलेज के ‘आधुनिक वास्तुकार’ के रूप में भी पहचान मिली।
डॉ. सैकिया ने १९ जून, २०१५ को डीएचएसके कॉलेज के प्राचार्य का पदभार संभाला। उनके नेतृत्व में संस्थान ने बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल व्यवस्था, प्रशासनिक आधुनिकीकरण और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
स्वच्छता के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता कॉलेज की विशिष्ट पहचान बन गई है। वे स्वयं सुबह-सुबह परिसर की सफाई अभियान में भाग लेते हैं और विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं। इस पहल से संस्थान में स्वच्छता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी की संस्कृति विकसित हुई है। फोर्ब्स में प्रकाशित लेख के अनुसार, सितंबर २०२६ तक कॉलेज का सुबह का स्वच्छता अभियान ४,५४७ दिन पूरे कर चुका था।
कॉलेज में तकनीकी आधुनिकीकरण को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत छात्र संघ के चुनाव पूरी तरह ऑनलाइन कराने, ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली लागू करने, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित स्मार्ट कक्षाओं, डिजिटल बोर्ड और कागज रहित प्रशासनिक व्यवस्था जैसी पहल की गई हैं। स्वच्छता के क्षेत्र में उनके प्रयासों की असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रानोज पेगू ने भी सराहना की है।
शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अतिरिक्त डॉ. सैकिया साहित्य, पत्रकारिता, पर्यावरण संरक्षण और समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं। वे अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘स्नेहबंधन’ के महासचिव हैं। इसके अलावा, वे ऐतिहासिक डिब्रूगढ़ साहित्य सभा के अध्यक्ष के रूप में दो कार्यकाल तक सेवाएं दे चुके हैं। वे डिब्रूगढ़ लाइब्रेरियंस एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं और १५ से अधिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े रहे हैं।
उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत और विदेशों के ३०० से अधिक संगठनों एवं संस्थानों ने उन्हें सम्मानित किया है। असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने उन्हें ‘कर्मसूर्य’ की उपाधि से सम्मानित किया था। इसके अतिरिक्त, उन्हें यूएसटीएम की ओर से शैक्षणिक नेतृत्व पुरस्कार–२०२२, जीवन पर्यंत उपलब्धि पुरस्कार–२०२४ और गुरु गौरव सम्मान–२०२६ सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं। अन्य सम्मानों में ‘शेपर्स ऑफ द फ्यूचर’ की उपाधि, असम गौरव पुरस्कार, परमानंद मानवसेवा रत्न पुरस्कार, साहित्य पुष्प पुरस्कार और बीर चिलाराय पुरस्कार शामिल हैं।
१७ जून, २०२३ को विश्व मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने नई दिल्ली स्थित डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के एक कार्यक्रम में उन्हें राजदूत प्रमाणपत्र प्रदान किया था। यह कार्यक्रम विश्व पर्यावरण दिवस से पूर्व आयोजित गतिविधियों के अंतर्गत हुआ था। हाल ही में, १७ सितंबर, २०२६ को प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर खानिकार खेल परिसर में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और डिब्रूगढ़ के विधायक प्रशांत फुकन ने उन्हें सम्मानित किया।
एक समर्पित लेखक और कवि के रूप में डॉ. सैकिया साहित्य जगत में भी सक्रिय हैं। वे नियमित स्तंभकार हैं और अब तक ४० से अधिक पुस्तकें प्रकाशित कर चुके हैं। असम के राज्यपाल द्वारा नामित उच्चस्तरीय शैक्षणिक समिति में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने असम साहित्य सभा की अंतरराज्यीय विदेशी मैत्री उपसमिति और शैक्षणिक समिति के संयोजक के रूप में कार्य किया है। वे यूनेस्को के पूर्वोत्तर संसाधन केंद्र में पैनल सदस्य और क्षेत्र-I के समन्वयक के रूप में भी अपनी भूमिका निभा चुके हैं।
मीडिया संस्थानों, जिनमें असम लाइव २४ शामिल है, तथा विभिन्न साहित्यिक और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों ने भी उनके योगदान को मान्यता दी है।
फोर्ब्स पत्रिका में डॉ. सैकिया की जीवन यात्रा का प्रकाशित होना उनके पेशेवर जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान उनके संघर्ष, शैक्षणिक नेतृत्व, संस्थान निर्माण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति समर्पण को अंतरराष्ट्रीय पहचान प्रदान करता है। इस उपलब्धि से डीएचएसके कॉलेज परिवार, उनके शुभचिंतकों और व्यापक समाज में गर्व तथा प्रसन्नता का माहौल है।