डिब्रूगढ़: डिब्रूगढ़ जिला स्वास्थ्य विभाग ने सुरक्षित मातृत्व की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए लगातार दूसरे वित्तीय वर्ष में भी जिले में “शून्य होम डिलीवरी” सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में शून्य घरेलू प्रसव दर्ज होने के बाद चालू वित्तीय वर्ष २०२६-२७ में अप्रैल से जुलाई तक भी जिले में एक भी घरेलू प्रसव की घटना सामने नहीं आई है।
जिला स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष के पहले चार महीनों में डिब्रूगढ़ जिले में कुल ५,८४८ प्रसव दर्ज किए गए और इन सभी प्रसवों को स्वास्थ्य संस्थानों में कराया गया। इस प्रकार इस अवधि में शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव सुनिश्चित हुआ।
यह आंकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। अप्रैल से जुलाई २०२५ के दौरान जिले में ५,३७९ प्रसव दर्ज किए गए थे, जबकि इस वर्ष इसी अवधि में ५,८४८ प्रसव हुए। यानी पिछले वर्ष की तुलना में ४६९ अधिक प्रसव, अर्थात लगभग ८.७२ प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
डिब्रूगढ़ जिले ने पिछले छह वर्षों के दौरान भी संस्थागत प्रसव के क्षेत्र में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है। जिला स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष २०२०-२१ में २३,२५२, २०२१-२२ में २१,६६२, २०२२-२३ में २२,६००, २०२३-२४ में २१,५९९, २०२४-२५ में २२,३३८ तथा २०२५-२६ में २१,८९५ संस्थागत प्रसव दर्ज किए गए।
इस प्रकार वित्तीय वर्ष २०२०-२१ से २०२५-२६ तक छह वर्षों में जिले में कुल १,३३,३४६ संस्थागत प्रसव हुए। इस अवधि में प्रत्येक वर्ष औसतन २१ हजार से अधिक प्रसव स्वास्थ्य संस्थानों में संपन्न हुए।
चाय-बागान बहुल डिब्रूगढ़ जिले के साथ-साथ ब्रह्मपुत्र के चर-चापोरी और भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण चुनौती रहा है। इसके बावजूद विभाग द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, जन-जागरूकता, गर्भवती महिलाओं के पंजीकरण, नियमित निगरानी और प्रसव पूर्व एवं प्रसवोत्तर देखभाल पर लगातार जोर दिया गया।
विभाग के अनुसार, प्रत्येक गर्भवती महिला का पंजीकरण और नियमित फॉलो-अप, स्वास्थ्य कर्मियों की सतत निगरानी, स्वास्थ्य संस्थानों को प्रसव के लिए तैयार रखना, आवश्यक एम्बुलेंस एवं रोगी परिवहन सुविधाओं की उपलब्धता तथा चर-चापोरी क्षेत्रों में नौका आधारित स्वास्थ्य सेवाओं जैसी व्यवस्थाओं ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और जागरूकता अभियानों के माध्यम से भी गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिवारों को संस्थागत प्रसव के लाभों के बारे में लगातार जागरूक किया गया। इसके परिणामस्वरूप अस्पताल में सुरक्षित प्रसव कराने की प्रवृत्ति को जिले में व्यापक सामाजिक स्वीकृति मिली है।
जिला स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि संस्थागत प्रसव में लगातार हो रही प्रगति केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि सुरक्षित मातृत्व और नवजात शिशु के सुरक्षित जन्म की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। विभाग आने वाले दिनों में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ सेवाओं को मजबूत करने और जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला को सुरक्षित प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत रहेगा।
अर्नब शर्मा
डिब्रूगढ़