[स्वास्थ्य, पोषण और व्यवहार में बदलाव के जरिए चाय बागानों को एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य, १२ महीने तक चलेगा पायलट प्रोजेक्ट]
डिब्रूगढ़: चाय बागान समुदायों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए डिब्रूगढ़ जिला प्रशासन और जिला स्वास्थ्य समिति ने रविवार को महत्वाकांक्षी पायलट परियोजना ‘एनीमिया मुक्त चाय बागान’ की शुरुआत की। इस अभियान के तहत जिले के आठ चाय बागानों को एनीमिया मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य चिकित्सा हस्तक्षेप, पोषण में सुधार, जन-जागरूकता और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के माध्यम से चयनित चाय बागानों को स्थायी रूप से एनीमिया मुक्त बनाना है।
इस कार्यक्रम के तहत डिब्रूगढ़ जिले के छह ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत दक्षिण जालान नगर, मनोहरी, लेंग्राई, जुतलीबाड़ी, लेपेटकटा, मोरान, दिनजॉय और असाबाम चाय बागानों को शामिल किया गया है।
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर सभी चयनित चाय बागानों में जागरूकता कार्यक्रम, प्रारंभिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण और हीमोग्लोबिन जांच की गई। जिला आयुक्त बिक्रम कैरी ने लेपेटकटा चाय बागान पहुंचकर पहले दिन की गतिविधियों का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ सहायक जिला आयुक्त कार्तिकेय कुमार भी उपस्थित थे।
वहीं, दक्षिण जालान नगर चाय बागान में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभारी संयुक्त निदेशक डॉ. सौमेंद्र कुमार भगवती ने जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ भाग लिया। जिले के अन्य चयनित चाय बागानों में भी जिला प्रतिनिधियों, अनुमंडलीय स्वास्थ्य अधिकारियों, प्रखंड अधिकारियों तथा चाय बागान प्रबंधन के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में कार्यक्रम शुरू किया गया।
इस पहल को एक सुनियोजित १२ महीने की कार्ययोजना के तहत लागू किया जाएगा। इसे चार चरणों में विभाजित किया गया है, जिनमें प्रारंभिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (बेसलाइन मैपिंग), चिकित्सकीय देखभाल (क्लिनिकल केयर), पोषण संबंधी सुधार (न्यूट्रिशनल शिफ्ट) और प्रभाव का मूल्यांकन (इम्पैक्ट ऑडिट) शामिल हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल एनीमिया की पहचान और उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर खान-पान, स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से इस समस्या के मूल कारणों का समाधान करना भी है।
इस परियोजना को स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग और चाय बागान प्रबंधन समितियों के आपसी समन्वय से संचालित किया जाएगा।
इस अभियान के तहत ० से ५ वर्ष तक के बच्चों, किशोरियों, महिलाओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को विशेष रूप से प्राथमिकता दी गई है।
एनीमिया आज भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है, विशेषकर चाय बागान समुदायों की महिलाओं और किशोरियों में इसका प्रभाव अधिक देखा जाता है। यह समस्या मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं को बढ़ाने, बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करने तथा लोगों की कार्यक्षमता को कम करने का कारण बन सकती है।
जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस पायलट परियोजना से चयनित चाय बागानों के लोगों के स्वास्थ्य संबंधी मानकों में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके सफल क्रियान्वयन से भविष्य में जिले के अन्य चाय बागानों में भी इस मॉडल का विस्तार करने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
यह पहल ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने और चाय बागान समुदायों के लिए स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।