जब तक दो मुद्दों पर सहमति नहीं होती है, तब तक गैरभाजपाई विपक्षी एकता और उसकी सफलता संभव नहीं है?

अभिमनोज. गैरभाजपाई विपक्षी एकता को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नई उर्जा के साथ एक बार फिर सक्रिय तो हो गए हैं, लेकिन जब तक दो मुद्दों पर सहमति नहीं होती है, तब तक गैरभाजपाई विपक्षी एकता और उसकी सफलता संभव नहीं है!
एक- कांग्रेस को नजरअंदाज करके बीजेपी को मात देना संभव नहीं है.
दो- लोकसभा चुनाव के नतीजों के आधार पर ही प्रधानमंत्री पद का फैसला किया जाना चाहिए, यदि चुनाव से पहले इस पर राजनीति हुई तो एकता केवल कागजी ही रहेगी.
ज्यादातर बड़े गैरभाजपाई दल पीएम नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता से बेदखल तो करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस को नजरअंदाज करके कामयाबी पाना चाहते हैं, जो संभव नहीं है.
बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, तेलंगाना के सीएम केसी राव, यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी पीएम नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता से हटाना तो चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस से दूर रहकर, जोकि संभव नहीं है, क्योंकि कांग्रेस को छोड़कर कोई भी दल पचास लोकसभा सीटें जीतने की हालत में नहीं है, ऐसे में ये नेता किसी विषम परिस्थिति में नाम दर्ज करवानेवाले पीएम तो बन सकते हैं, लेकिन स्थाई सरकार नहीं दे सकते हैं और कांग्रेस को नजरअंदाज करके तो बहुमत भी नहीं जुटा सकते हैं.
खबरों की मानें तो नीतीश कुमार विपक्षी एकता की बात करने पश्चिम बंगाल के दौरे पर जा रहे हैं, जहां वे ममता बनर्जी से चर्चा करेंगे, लेकिन ममता बनर्जी तो कांग्रेस से दूरी बनाकर चल रही हैं, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नए प्रयास का क्या नतीजा निकलता है?
हालांकि, सियासी सयानों का मानना है कि विपक्षी एकता नहीं हो, तब भी 2024 जीतना मोदी टीम के बेहद मुश्किल है और यदि एकता अभियान में नीतीश कुमार कामयाब हो गए तो फिर कोई चमत्कार ही मोदी सरकार की वापसी करवा सकता है?

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