चूड़ियॉं (दोहे)

हाथों में सज चूड़ियॉं, करती मधु झंकार।

खन-खन-खन की ताल से, करे प्रेम संचार।। 

ये हरी-भरी चूड़ियॉं, सजनी का श्रृंगार। 

सजना लाए प्रेम से, प्यारा सा उपहार।। 

सजी कलाई चूड़ियॉं, सौभाग्य का प्रतीक।

गृहलक्ष्मी के आंतरिक, राजस्व का प्रतीत।। 

चम-चम चमके चूड़ियॉं, मन को लेती जीत। 

खन-खन की आवाज में, गाती मीठा गीत।। 

चूड़ी हर परिवार में, देती शुभ संदेश।

मिल-जुलकर रहना भला, हो सुंदर परिवेश।। 

रखे परिवार जोड़ कर, मीठी-मीठी तान।

खनन-खनन की तान से, खिलती है मुस्कान।। 

गढ़ती शुभ संस्कार वो, सौभाग्यवती नार।

खनके जिसके हाथ में, चूड़ी की झंकार।। 

सावन आया है सखी, जगे भाव कुछ खास।

हरी -हरी ये चूडियॉं, सुख का दे अहसास।। 

जन्मों का संबंध ये, संस्कारों की रीत।

सुहागिनों की प्रार्थना, सुखी रहें मनमीत।। 

तीज-त्यौहार की चमक, चूड़ियों भरा हाथ।

सजे “आनंद” हर सपन, साजन-सजनी साथ।। 

बिखरे ख़ुशियों की महक, बजता जब संगीत।

भरे उत्साह चूड़ियॉं, जीवन का प्रिय गीत।। 

प्रेम समर्पण की यही, जानो सच्ची बात।

बागबान में चूड़ियॉं, लाएं नवल प्रभात।। 

– मोनिका डागा “आनंद”, चेन्नई 

आपके स्नेह और प्यार का धन्यवाद 

रचना स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित

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