गुरूचरण विश्वविद्यालय में 135वां देशभक्त दिवस मनाया गया

शिलचर, 13 अगस्त। गुरूचरण विश्वविद्यालय के मणिपुरी विभाग की पहल पर गुरुवार को विश्वविद्यालय के सभाकक्ष में 135वां देशभक्त दिवस गरिमापूर्ण ढंग से मनाया गया। कार्यक्रम में 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के वीर सेनानियों, विशेष रूप से वीर टिकेंद्रजीत सिंह और थांगल जनरल के बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के मणिपुरी भाषा परामर्शदात्री बोर्ड के सदस्य डॉ. के. नयन चांद सिंह थे। मुख्य वक्ता विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. एल. जयचंद्र सिंह रहे। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन राय, रजिस्ट्रार डॉ. विद्युत कांति पाल, शैक्षणिक रजिस्ट्रार डॉ. अभिजीत नाथ सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उपस्थित थे।

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। वैभवी सिंह ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मणिपुरी विभागाध्यक्ष डॉ. एन. विद्य‍ासागर सिंह ने स्वागत भाषण दिया। इसके बाद विभाग की अतिथि शिक्षिका डॉ. एच. आशानंदिता देवी ने वीर टिकेंद्रजीत सिंह पर लिखी अपनी स्वरचित कविता का पाठ किया।

मुख्य वक्ता डॉ. एल. जयचंद्र सिंह ने 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध तथा वीर टिकेंद्रजीत सिंह और थांगल जनरल के बलिदान के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 13 अगस्त केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि बलिदान, साहस और मातृभूमि के प्रति दायित्व का प्रतीक है। एंग्लो-मणिपुर युद्ध के बाद 13 अगस्त को ब्रिटिश शासन ने इम्फाल के फेइदाबुंग क्षेत्र में वीर टिकेंद्रजीत सिंह और थांगल जनरल को सार्वजनिक रूप से फांसी दी थी। मणिपुर की स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए उनका बलिदान आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में पाओना ब्रजबासी, पुख्रमबम काजाओ, निरंजन सुबेदार और चिराई नागा सहित अनेक ज्ञात-अज्ञात देशभक्तों ने भी अपने प्राणों की आहुति दी। खोंगजोम का युद्धक्षेत्र आज भी उनके साहस और संघर्ष की ऐतिहासिक गवाही देता है।

मुख्य अतिथि डॉ. के. नयन चांद सिंह ने वीर टिकेंद्रजीत, थांगल जनरल सहित मणिपुर के वीर देशभक्तों के संघर्ष और बलिदान के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी को उनके साहस, देशप्रेम और त्याग से प्रेरणा लेकर देश एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ कार्य करना चाहिए।

कुलपति प्रो. निरंजन राय ने अपने संबोधन में फेक न्यूज, फेक नैरेटिव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में सूचना का प्रसार तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके साथ गलत और भ्रामक सूचनाएं भी तेजी से फैल रही हैं। ऐसे में तकनीक के इस्तेमाल के दौरान जागरूकता, तथ्यों की जांच और जिम्मेदारी बेहद आवश्यक है। उन्होंने देशभक्तों के त्याग और आदर्शों से प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी से समाज एवं राष्ट्र के कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर मेहदी हसन चौधरी ने किया। इस अवसर पर मणिपुरी विभाग की छात्राओं निवेदिता सिंह, सिजिता सिंह और मनीषा सिंह ने नृत्य प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आकर्षक बनाया।

Leave a Comment