कौन कहता है कि अपराधी का कोई धर्म नहीं होता ! ओवैसी को अतीक अहमद का मजहब अच्छे से दिखा

धर्म की राजनीति कर रहे ओवैसी- भाजपा 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में हुई माफिया और समाजवादी पार्टी (सपा) के पूर्व सांसद अतीक अहमद हत्याकांड के बाद से राजनेता इसमें मुस्लिम एंगल तलशने लगे हैं।

ये एक तरह से विडम्बना ही है कि जिस माफिया ने 40 वर्षों तक पूरे यूपी में आतंक मचाए रखा, एक चुने हुए विधायक को बीच सड़क पर मरवा दिया, खुद के खिलाफ कोई गवाही न दे, इसलिए जेल में रहते हुए भी गवाह की हत्या करवा दी, उस गैंगस्टर में आज नेताओं को मुस्लिम नज़र आने लगा है। वैसे ये वही लोग हैं, जो कहा करते हैं कि, अपराधी का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन उन्हें अतीक का मजहब भरपूर नज़र आ रहा है। आए भी क्यों न, सब कुछ जानते हुए भी ओवैसी ने ही अतीक के परिवार को अपनी पार्टी AIMIM में शामिल किया था ।

दरअसल, AIMIM चीफ और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मामले में बेतुकी टिप्पणी की है. ओवैसी ने एक बार फिर वर्ष 2002 में हुए गुजरात दंगों को याद किया है. इसके साथ ही ट्वीट करते हुए कहा है कि अतीक दूसरे मुस्लिम पूर्व सांसद हैं, जिनकी इस तरह हत्या की गई है. रविवार को ओवैसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘अतीक दूसरे मुस्लिम पूर्व सांसद हैं, जिनकी निर्मम हत्या कर दी गई है. उन्होंने ट्वीट में एहसान जाफरी के नाम का भी जिक्र किया। 

ओवैसी ने कहा कि इससे पहले एहसान जाफरी को 2002 में गुजरात में एक भीड़ ने निर्ममता से मार डाला था और आज अब अतीक अहमद की पुलिस हिरासत में गोली मार कर हत्या कर दी गई है. हालाँकि, गौर करने वाली बात ये भी है कि, जब अतीक आतंक मचा रहा था, राजनेताओं के दबाव में पुलिस उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाती थी, 10 जज उसके खिलाफ सुनवाई करने से इंकार कर देते थे, तब ओवैसी को सब लोकतान्त्रिक लगता था, आज जब उसी गैंगस्टर को दूसरे अपराधियों ने मार दिया, तो ओवैसी समाज में विभाजन पैदा करने के लिए मुस्लिम कार्ड खेल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट को इस तरह के बयानों का संज्ञान लेना चाहिए, वरना ओवैसी जैसों के बयानों से भड़ककर एक कि जगह 10 अतीक पैदा हो सकते हैं, जो समाज के लिए घातक होंगे।

धर्म की राजनीति कर रहे ओवैसी

बीजेपी ने ओवैसी पर तंज कसते हुए कहा है कि वह धर्म की राजनीति कर रहे हैं. पार्टी की ओर से जारी आंकड़ों में उन लोगों की लिस्ट दी गई है जिनकी पुलिस कस्टडी के दौरान मौत हुई है. बीजेपी ने इस दौरान सवालियां अंदाज में ओवैसी के दावे को खारिज किया है. पार्टी ने लिखा है, क्या यूपी में धर्म विशेष के खिलाफ कार्यवाही हो रही है? इसके बाद आंकड़े जारी किए गए हैं.

केंद्र में सत्ताधारी पार्टी ने लिस्ट जारी करके बताया है कि 20 मार्च 2017 से लेकर 12 अप्रैल 2023 तक राज्य में कुल 10933 कार्रवाई की गई हैं. इन कार्रवाई में पुलिस ने 23,348 बदमाशों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी और धर-पकड़ के दौरान कुल 183 अभियुक्त मारे गए हैं. वहीं पुलिस के 13 जवान शहीद हुए हैं. बीजेपी की ओर से जारी इन आंकड़ों में मुस्लिमों पर हुई कार्रवाई के आंकड़ें भी अलग से जारी किए गए हैं.

183 की मौत, 59 मुसलमान

आंकड़ों के मुताबिक 5046 आरोपी जख्मी हुए हैं और 1443 पुलिसकर्मी इन धर-पकड़ के दौरान जख्मी हुए. इनमें स्पष्ट दिया गया है कि कुल 183 लोगों की मौत हुई है उनमें से 59 मुसलमान हैं. इसका मतलब है कि मारे गए कुल अभियुक्तों में 32.24 प्रतिशत मुसलमान हैं. बीजेपी ने साल दर साल के आंकड़ें भी जारी किए हैं. वहीं पार्टी की ओर से कहा है गया है कि अभी 5-5 लाख इनाम वाले असद-गुलाम मारे गए हैं.

इनके अलावा 2.5 लाख इनाम वाले बिजनौर निवासी आदित्य राना, संभल निवासी शकील, संभल निवासी कमल, बुलंदशहर निवासी बलराज भाटी शामिल हैं. यहां पढ़ें पिछले कुछ सालों में मारे गए अभियुक्तों की कुल संख्या और उनमें कितने मुस्लिम शामिल थे…

2023

14 मारे गए- 5 मुसलमान

2022

14 मारे गए, 1 मुसलमान

2021

26 मारे गए, 7 मुसलमान

2020

26 मारे गए, 5 मुसलमान

2019

34 मारे गए, 12 मुसलमान

2018

41 मारे गए, 14 मुसलमान

2017

28 मारे गए, 15 मुसलमान– Show quoted text –

धर्म की राजनीति कर रहे ओवैसी

बीजेपी ने ओवैसी पर तंज कसते हुए कहा है कि वह धर्म की राजनीति कर रहे हैं. पार्टी की ओर से जारी आंकड़ों में उन लोगों की लिस्ट दी गई है जिनकी पुलिस कस्टडी के दौरान मौत हुई है. बीजेपी ने इस दौरान सवालियां अंदाज में ओवैसी के दावे को खारिज किया है. पार्टी ने लिखा है, क्या यूपी में धर्म विशेष के खिलाफ कार्यवाही हो रही है? इसके बाद आंकड़े जारी किए गए हैं.

केंद्र में सत्ताधारी पार्टी ने लिस्ट जारी करके बताया है कि 20 मार्च 2017 से लेकर 12 अप्रैल 2023 तक राज्य में कुल 10933 कार्रवाई की गई हैं. इन कार्रवाई में पुलिस ने 23,348 बदमाशों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तारी और धर-पकड़ के दौरान कुल 183 अभियुक्त मारे गए हैं. वहीं पुलिस के 13 जवान शहीद हुए हैं. बीजेपी की ओर से जारी इन आंकड़ों में मुस्लिमों पर हुई कार्रवाई के आंकड़ें भी अलग से जारी किए गए हैं.

183 की मौत, 59 मुसलमान

आंकड़ों के मुताबिक 5046 आरोपी जख्मी हुए हैं और 1443 पुलिसकर्मी इन धर-पकड़ के दौरान जख्मी हुए. इनमें स्पष्ट दिया गया है कि कुल 183 लोगों की मौत हुई है उनमें से 59 मुसलमान हैं. इसका मतलब है कि मारे गए कुल अभियुक्तों में 32.24 प्रतिशत मुसलमान हैं. बीजेपी ने साल दर साल के आंकड़ें भी जारी किए हैं. वहीं पार्टी की ओर से कहा है गया है कि अभी 5-5 लाख इनाम वाले असद-गुलाम मारे गए हैं.

इनके अलावा 2.5 लाख इनाम वाले बिजनौर निवासी आदित्य राना, संभल निवासी शकील, संभल निवासी कमल, बुलंदशहर निवासी बलराज भाटी शामिल हैं. यहां पढ़ें पिछले कुछ सालों में मारे गए अभियुक्तों की कुल संख्या और उनमें कितने मुस्लिम शामिल थे…

2023

14 मारे गए- 5 मुसलमान

2022

14 मारे गए, 1 मुसलमान

2021

26 मारे गए, 7 मुसलमान

2020

26 मारे गए, 5 मुसलमान

2019

34 मारे गए, 12 मुसलमान

2018

41 मारे गए, 14 मुसलमान

2017

28 मारे गए, 15 मुसलमान

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