काश के फूलों के बीच शारदीय उत्सव की दस्तक, अस्पताल रोड में दिखेगा थीम का अनोखा संसार

58वें वर्ष में थाईलैंड के बौद्ध मंदिर और समुद्र में समाई द्वारका की झलक, उत्तर-पूर्व के दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण

उधारबंद, प्रतिनिधि।
निर्मल नीले आकाश में तैरते रूई जैसे सफेद बादल, नदी किनारे लहराते काश के फूल, शिउली की सुगंध और सुबह की ओस की बूंदें—प्रकृति के कण-कण में शारदीय दुर्गोत्सव के आगमन का संदेश सुनाई देने लगा है। दुर्गापूजा की उलटी गिनती शुरू होते ही उधारबंद अस्पताल रोड दुर्गोत्सव समिति के पूजा मंडप में भी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।

उत्तर-पूर्व के चर्चित और अनेक पुरस्कारों से सम्मानित पूजा आयोजनों में अपनी अलग पहचान बना चुका अस्पताल रोड दुर्गोत्सव इस वर्ष 58वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी प्रतिमा, मंडप सज्जा और विद्युत सज्जा में नवीनता के साथ दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण तैयार किया जा रहा है।

सोमवार को आयोजित पत्रकार सम्मेलन में पूजा समिति के अध्यक्ष दुलाल चंद्र देव और सचिव स्वरूप दत्त की उपस्थिति में मुख्य संरक्षक एवं उधारबंद के विधायक राजदीप गोयाला ने इस वर्ष की पूजा की विशेष तैयारियों और थीम की जानकारी दी।

विधायक राजदीप गोयाला ने बताया कि खुटी पूजा के अवसर पर आमंत्रित होने के बावजूद गुवाहाटी में रहने के कारण वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे। हालांकि, अब मंडप और प्रतिमा निर्माण का जायजा लेने के बाद वे तैयारियों से काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन मंडप की कलात्मकता और आकर्षण अभी से लोगों का ध्यान खींच रहा है। उन्होंने बराक घाटी सहित पूरे उत्तर-पूर्व के लोगों से अस्पताल रोड की पूजा में पहुंचकर इस अनूठी कलाकृति का आनंद लेने का आह्वान किया तथा पूजा समिति को हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

पूजा समिति के पदाधिकारी राजेश राय ने बताया कि इस वर्ष मंडप की थीम थाईलैंड के बौद्ध मंदिर पर आधारित है। मंडप सज्जा की जिम्मेदारी विश्वजीत दंडपाट को दी गई है, जबकि प्रतिमा का निर्माण कांथी के प्रसिद्ध मूर्तिकार उत्तम जाना कर रहे हैं।

समुद्र के गर्भ में समाई द्वारका होगी मुख्य आकर्षण

इस वर्ष की पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण मंडप के भीतर देखने को मिलेगा। यहां महाभारतकालीन द्वारका नगरी के समुद्र में समा जाने की पौराणिक कथा को कलात्मक रूप में जीवंत किया जाएगा। समुद्र की गहराइयों में विलीन हो चुकी द्वारका की कल्पनात्मक झलक दर्शकों को इतिहास, पुराण और कला के अद्भुत संसार में ले जाएगी।

इसके साथ ही मंडप में ऐतिहासिक हावड़ा ब्रिज की विशेष प्रस्तुति भी देखने को मिलेगी। आयोजकों का मानना है कि थाईलैंड के बौद्ध मंदिर, समुद्र में समाई द्वारका और अन्य कलात्मक प्रस्तुतियों का यह अनूठा संयोजन इस वर्ष की पूजा को विशेष पहचान देगा।

अस्पताल रोड दुर्गोत्सव पहले ही उत्तर-पूर्व के विभिन्न हिस्सों में अपनी विशिष्ट थीम और कलात्मक प्रस्तुति के लिए कई पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। ऐसे में इस वर्ष भी न केवल उधारबंद, बल्कि पूरे बराक घाटी और उत्तर-पूर्व के पूजा प्रेमियों की नजर इस आयोजन पर टिकी हुई है।

आयोजकों के अनुसार, सब कुछ योजनानुसार रहा तो महाषष्ठी से पहले द्वितीया तिथि को ही मंडप का शुभ उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन समारोह में शिलचर रामकृष्ण मिशन के महाराज, मुख्य संरक्षक एवं विधायक राजदीप गोयाला सहित कई विशिष्ट अतिथियों के उपस्थित रहने की संभावना है।

पत्रकार सम्मेलन में चंदन राय, आमिर चांद जहांगीर, रूपंकर धर, रंजीत बनिक, अलक दास, शांतनु सेन, दर्शन उपाध्याय सहित पूजा समिति के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।

शरद ऋतु की काश की लहरों के बीच उधारबंद अस्पताल रोड एक बार फिर कला, संस्कृति, इतिहास और आस्था की नई कहानी कहने को तैयार है। थाईलैंड के बौद्ध मंदिर से लेकर समुद्र में समाई द्वारका तक—इस वर्ष का यह अनूठा कलात्मक संगम उत्तर-पूर्व के दर्शकों को कितना आकर्षित करता है, इसका इंतजार अब पूरे बराक घाटी को है।

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