एनजीटी ने एटलिन परियोजना की पर्यावरण मंजूरी के खिलाफ अपील स्वीकार की

ईटानगर/कोलकाता: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ, कोलकाता ने अरुणाचल प्रदेश की प्रस्तावित ३,०९७ मेगावाट एटलिन जलविद्युत परियोजना को दी गई पर्यावरण मंजूरी के खिलाफ दायर अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। अधिकरण ने १२ अगस्त २०२६ को मामले में आदेश पारित करते हुए अपील दाखिल करने में हुई ५८ दिनों की देरी को भी माफ कर दिया।

यह अपील लख्यज्योति गोगोई ने अधिवक्ता विक्रम राजखोवा के माध्यम से दायर की है। इसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा २३ अगस्त २०२५ को एसजेवीएन लिमिटेड के पक्ष में जारी पर्यावरण मंजूरी को चुनौती दी गई है।

एटलिन परियोजना अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी दिबांग घाटी जिले के एटालिन और अनिनी उप-जिलों में प्रस्तावित है। परियोजना के लिए अदापोवा, अगुली और एमुली समेत कई गांवों में करीब १,१७५.०३ हेक्टेयर भूमि के इस्तेमाल का प्रस्ताव है। यह परियोजना द्री और तांगोन (तालो) नदियों के जल पर आधारित है।

अपीलकर्ता ने निर्धारित समय सीमा के बाद अपील दायर करने में हुई ५८ दिनों की देरी को माफ करने का अनुरोध किया था। परियोजना की कंपनी एसजेवीएन लिमिटेड ने देरी पर आपत्ति जताई। हालांकि, एनजीटी ने माना कि अपीलकर्ता ने देरी के कारणों को पर्याप्त रूप से स्पष्ट किया है और मामले में दुर्भावना या लापरवाही के संकेत नहीं हैं।

अधिकरण ने कहा कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में केवल तकनीकी आधार पर किसी पक्ष को न्याय से वंचित करने के बजाय व्यापक पर्यावरणीय और जनहित के पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है। इसके बाद एनजीटी ने देरी को माफ करते हुए अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

हालांकि, एनजीटी के इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि एटलिन परियोजना की पर्यावरण मंजूरी रद्द कर दी गई है। अधिकरण ने फिलहाल केवल अपील को स्वीकार किया है। पर्यावरण मंजूरी की वैधता और अपील में उठाए गए अन्य मुद्दों पर फैसला मामले की आगे की सुनवाई के दौरान किया जाएगा।

एनजीटी ने मंत्रालय और एसजेवीएन लिमिटेड समेत संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई १५ अक्टूबर २०२६ को निर्धारित की गई है।

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