उधारबंद में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ दुर्गा प्रतिमा विसर्जन, पांच दिनों तक रही उत्सव की धूम

भव्य पूजा पंडालों में उमड़ी भीड़, 180 वर्ष पुरानी पारिवारिक पूजा बनी आकर्षण का केंद्र

उधारबंद, 22 अक्टूबर। कछार जिले के उधारबंद में पांच दिनों तक चले शारदीय दुर्गोत्सव का समापन शांतिपूर्ण ढंग से प्रतिमा विसर्जन के साथ हुआ। पंचमी से ही भव्य पूजा पंडालों में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ने लगी थी। षष्ठी से नवमी तक मुख्य सड़कों पर जनसैलाब उमड़ा और देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा।

इस वर्ष अस्पताल रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति का पंडाल थाईलैंड के बौद्ध मंदिर की शैली में बनाया गया था, जिसके भीतर द्वारका नगरी का दृश्य प्रस्तुत किया गया। वहीं, कालीबाड़ी रोड सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति का पंडाल अमेरिका के स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर बनाया गया था। इसमें राजस्थान की कलात्मक नक्काशी और बाबुई घास से निर्मित प्रतिमा आकर्षण का केंद्र रही। शिवसंघ का पंडाल गोवा के दूधसागर जलप्रपात की थीम पर आधारित था। विभिन्न पंडालों का उद्घाटन शिलचर रामकृष्ण मिशन के संतों ने किया।

कांचा कांति मंदिर पहुंचे मुख्यमंत्री

अष्टमी के दिन असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने उधारबंद स्थित श्रीश्री कांचा कांति मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान मंत्री कौशिक राय, विधायक राजदीप ग्वाला, डॉ. राजदीप राय, किशोर नाथ, कमलाक्ष देब पुरकायस्थ सहित भाजपा के कई नेता उपस्थित थे। पूजा के बाद मुख्यमंत्री श्रद्धालुओं के बीच पहुंचे और उनके साथ सेल्फी भी ली।

इस वर्ष कछार केसरी सनत कुमार दास के घर की दुर्गापूजा 180वें वर्ष में प्रवेश कर गई। पूजा आयोजक निखिलेश दास ने प्रेरणा भारती के प्रतिनिधि नीहार कांति राय को बताया कि समय के साथ मेले और जात्रा जैसी पुरानी परंपराओं में बदलाव आया है, लेकिन परिवार ने पूजा की परंपरा कायम रखी है।

कड़ी सुरक्षा के बीच प्रतिमा विसर्जन

उधारबंद वन क्षेत्र के निकट मधुरा नदी के विसर्जन घाट पर प्रतिमाओं का विसर्जन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उधारबंद थाना प्रभारी चिरंजीत बोरा और सर्किल अधिकारी प्रणबानंद दोवारा रात 12 बजे तक घाट पर मौजूद रहे। विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल तैनात था।

विधायक राजदीप ग्वाला की पहल पर विसर्जन से पहले घाट की साफ-सफाई कराई गई। इस दौरान ढाक की थाप पर नृत्य और पारंपरिक धामाइल नृत्य ने उत्सव की रौनक बढ़ाई। विभिन्न समुदायों के लोगों की सहभागिता ने सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।

उधारबंद के अलावा अरुणाबंद में तीन तथा शालगंगा क्षेत्र में टिकोल नदी में 11 प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। कछार केसरी सनत कुमार दास के घर की प्रतिमा का विसर्जन घर के निकट, जबकि कांचा कांति मंदिर की प्रतिमा का विसर्जन पुष्करिणी में किया गया।

कुछ छोटी-मोटी दुर्घटनाओं को छोड़कर कोई बड़ी अप्रिय घटना नहीं हुई। शांतिपूर्ण आयोजन पर स्थानीय लोगों ने राहत जताते हुए विधायक और पुलिस-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर, उधारबंद में दुर्गोत्सव उल्लास, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक बना।

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