बंकिमचंद्र की अमर रचना के 150 वर्ष पूरे होने पर कांचा कांती मंदिर में भावपूर्ण आयोजन
निहार कांति राय उधारबंद, 25 सितंबर। जिस ‘वंदे मातरम्’ के स्वर ने कभी पराधीन भारत को आंदोलित किया था, वही अमर राष्ट्रगीत शुक्रवार को उधारबंद के श्रीश्री कांचा कांती मंदिर परिसर में नई पीढ़ी के हजारों कंठों से गूंज उठा। बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर कांचा कांती विद्या मंदिर के तत्वावधान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, अतिथियों और स्थानीय लोगों ने सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। इस दौरान मंदिर परिसर देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना के भाव से सराबोर हो उठा।
मुख्य अतिथि एवं श्री कांचा कांती सेवा समिति के महासचिव अंशुमान दत्त ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक कविता या गीत नहीं, बल्कि इसके प्रत्येक शब्द में देशभक्ति की प्रेरणा निहित है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इसने असंख्य लोगों में साहस और आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को इसके इतिहास और महत्व से परिचित कराना आवश्यक है।
असम विश्वविद्यालय के समाजकार्य विभाग की सहायक प्राध्यापिका अदिति नाथ ने बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की विचारधारा तथा ‘वंदे मातरम्’ की रचना के पीछे निहित राष्ट्रभावना पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। स्वागत भाषण कांचा कांती विद्या मंदिर के निदेशक हरिहर चक्रवर्ती ने दिया। इसके बाद विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका संगीता चौधरी ने किया।
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधानाचार्या शिखा कुंडू, उधारबंद जीपी अध्यक्ष काकली कर, शालगंगा जीपी अध्यक्ष एस. राखी चौधरी, मधुरा जीपी अध्यक्ष रीता देव, श्री कांचा कांती सेवा समिति के कार्यकारिणी सदस्य सोमनाथ देव सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
आयोजन के माध्यम से इतिहास और वर्तमान का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। नई पीढ़ी के सामूहिक स्वर में गूंजता ‘वंदे मातरम्’ कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।