बड़जालेंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्था पर लोगों में भारी आक्रोश, तीन मरीजों की मौत का दावा; तत्काल सुधार नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
शिलचर। कछार जिले के बड़जालेंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है। आरोप है कि चिकित्सकों की नियमित अनुपस्थिति, एंबुलेंस के लिए चालक की कमी और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में अब तक तीन मरीजों की जान जा चुकी है। हैरानी की बात यह है कि यह स्वास्थ्य केंद्र जिले के सांसद परिमल शुक्लवैद्य के आवास से महज कुछ दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस पहल नहीं होने से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन चिकित्सक नियुक्त हैं, लेकिन वे नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते। नतीजतन, आपातकालीन परिस्थितियों में चिकित्सकों के बजाय नर्सों को ही मरीजों का उपचार करना पड़ता है। स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस तो उपलब्ध है, लेकिन चालक नहीं होने के कारण उसका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा, आवश्यक ऑक्सीजन सुविधा की कमी भी मरीजों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है।
इस अव्यवस्था का ताजा मामला गत 26 अक्टूबर की शाम सामने आया। छोटजालेंगा दासग्राम द्वितीय खंड निवासी श्यामल दास को अचानक सांस लेने में तकलीफ होने पर परिजन उन्हें बड़जालेंगा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। परिजनों का आरोप है कि उस समय स्वास्थ्य केंद्र में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। वहां उपस्थित एक नर्स ने मरीज को ऑक्सीजन दी, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। आरोप है कि इसके बाद एक इंजेक्शन दिए जाने के कुछ ही समय बाद श्यामल दास की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, मरीज की मृत्यु के करीब एक घंटे बाद चिकित्सक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे।
इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब स्वास्थ्य केंद्र में तीन चिकित्सक नियुक्त हैं, तो जरूरत के समय वे उपलब्ध क्यों नहीं रहते? एंबुलेंस होने के बावजूद चालक की व्यवस्था क्यों नहीं है? आपातकालीन मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी आखिर नर्सों के भरोसे क्यों छोड़ दी गई है?
स्वास्थ्य केंद्र प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य धर्मेंद्र तिवारी ने भी स्वास्थ्य केंद्र की अव्यवस्थाओं से जुड़ी शिकायतों को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों की अनियमित उपस्थिति और स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति के संबंध में स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त निदेशक तथा मिशन निदेशक को लिखित शिकायत भेजी जा चुकी है। उनका कहना है कि वर्तमान स्वास्थ्यकर्मियों को अन्यत्र स्थानांतरित कर नए कर्मचारियों की नियुक्ति किए बिना यहां की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार संभव नहीं है।
वहीं, धलाई उपमंडल के एसडीएमओ ने आश्वासन दिया है कि लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अन्य स्थानों से स्वास्थ्यकर्मियों को लाकर किसी तरह इस स्वास्थ्य केंद्र का संचालन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल सभी रिक्त पदों को भरने, चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा एंबुलेंस के लिए स्थायी चालक नियुक्त करने की मांग की है। साथ ही स्वास्थ्य केंद्र में आवश्यक जीवनरक्षक सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो वे व्यापक जनआंदोलन शुरू करने को बाध्य होंगे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि जिले के सांसद के आवास से इतनी नजदीक स्थित एक सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की हालत इतनी खराब है, तो जिले के दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी होगी? स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से तत्काल ठोस कार्रवाई चाहिए।