असम विश्वविद्यालय में राजभाषा कार्यशाला सम्पन्न, हिन्दी सहज और सरल भाषा है, कार्य करना आसान-कुलपति

यशवन्त पाण्डेय, शिलकुड़ी 9 सितम्बर। सितम्बर माह हिन्दी माह के रूप में माना जाता है, हिन्दी की बढ़ावा के लिए सभी केन्द्रीय प्रतिष्ठानों में विभिन्न प्रकार कार्यक्रमों के तहत मनाया जाता है, इसी कड़ी में शुक्रवार को असम विश्वविद्यालय शिलचर में राजभाषा विभाग के तत्वाबधान में हिंदी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में असम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजीव मोहन पंत उपस्थित थे। कुलपति एवं अन्य अतिथियों के करकमलों से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में कुलपति ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि “हिंदी एक सरल भाषा है, इसमें कार्य करना आसान है, बस मानसिकता बदलने की जरूरत है। उन्होंने कर्मचारियों से निवेदन किया कि “हमें हिंदी में कार्य संस्कृति को बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए”। आगे उन्होंने संस्कृत गांव का जिक्र करते हुए कहा कि बराक घाटी में अनिपुर और पटियाला दो बांग्ला भाषी गांव है, दोनो गांवो के लोग आपस में संस्कृत में ही संवाद करते हैं। इससे हमें प्रेरणा लेकर हिंदी के विकास में हर संभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय के राजभाषा प्रकोष्ठ के सराहनीय कार्यों की प्रसंशा की। इस अवसर पर कुलसचिव, डॉ. प्रदोष किरण नाथ ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला के आयोजन से हमें टिप्पणी और मसौदा लेखन में मदद मिलती है। उन्होंने कर्मचारियों से अनुरोध करते हुए कहा कि अधिक से अधिक कार्य हिंदी में करें, जिससे राजभाषा हिंदी की उन्नति हो। जवाहर नवोदय विद्यालय पैलापुल के प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक विकास कुमार उपाध्याय ने “टिप्पण और मसौदा लेखन’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम का संचालन असम विश्वविद्यालय के हिंदी अधिकारी डॉक्टर सुरेंद्र कुमार उपाध्याय ने किया। उन्होंने राजभाषा हिंदी में कार्य करने के लिए सभी प्रशिक्षित कर्मचारियों से अपील किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के हिन्दी अनुवादक पृथ्वीराज ग्वाला ने सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में संतोष ग्वाला (हिंदी टंकक) ने सहायता प्रदान की।

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