अरुणाचल प्रदेश ने नई कृषि, बागवानी और मधुमक्खी पालन नीतियां जारी कीं

नाहरलागुन (अरुणाचल प्रदेश): अरुणाचल प्रदेश ने कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों में व्यापक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तीन प्रमुख नीतिगत दस्तावेज जारी किए हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश कृषि नीति २०२५–३५, बागवानी नीति २०२५–३५ और मधुमक्खी पालन एवं शहद नीति २०२५–३५ शामिल हैं।

नाहरलागुन स्थित कृषि निदेशालय में मुख्यमंत्री पेमा खांडू और वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इन नीतियों का औपचारिक रूप से अनावरण किया गया। नई नीतियों का उद्देश्य राज्य की कृषि, बागवानी और शहद उत्पादन की विशाल संभावनाओं का बेहतर उपयोग करना, किसानों के लिए रोजगार एवं आजीविका के अवसर बढ़ाना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि ये नीतियां अरुणाचल प्रदेश की कृषि क्षमता को टिकाऊ विकास और ग्रामीण समुदायों की समृद्धि में बदलने के लिए दीर्घकालिक दिशा-निर्देश प्रदान करेंगी।

इस अवसर पर एक अन्य महत्वपूर्ण पहल के तहत अरुणाचल प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड ने एमओवीसीडी-एनईआर के अंतर्गत पूर्वोत्तर भारत की पहली जैविक कॉफी बीन्स का शुभारंभ किया। इस पहल से क्षेत्र के कॉफी उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है। साथ ही, अरुणाचल प्रदेश को उच्च गुणवत्ता वाले जैविक कृषि उत्पादों के उभरते हुए प्रमुख उत्पादक के रूप में स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान मेहनतकश किसानों के योगदान को सम्मानित करने के लिए ‘हार्वेस्ट ऑफ द मंथ फार्मर’ पहल के तहत किसानों को सम्मानित किया गया। मिक्ट्रानी मौंगकांग, चाउ मिंगतू नामचूम, नेतान दोरजी थुंगोन और ताबा तारा को कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इसके अलावा, नाहरलागुन स्थित कृषि निदेशालय में राज्य कृषि सूचना केंद्र-सह-किसान छात्रावास का भी उद्घाटन किया गया। इस सुविधा का उद्देश्य किसानों को कृषि संबंधी जानकारी, संस्थागत सहायता और राज्य की राजधानी में कृषि गतिविधियों के सिलसिले में आने पर आवास की सुविधा उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार के अनुसार, इन सभी पहलों का संयुक्त उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत करना, किसानों के लिए सहायता व्यवस्था को बेहतर बनाना और टिकाऊ कृषि विकास के नए अवसर पैदा करना है।

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