22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीराम मंदिर का उद्घाटन समारोह है, इसके लिए सबसे पहले संतों और राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कई अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और मंदिर के उद्घाटन के लिए निमंत्रण दिया, अच्छा किया, लेकिन…. जशोदाबेन को कब आमंत्रित किया जाएगा?
याद रहे, इससे पहले भी श्रीराम मंदिर पूजा में पीएम नरेंद्र मोदी अकेले ही बैठे थे, जबकि सनातन धर्म में किसी भी प्रमुख पूजा में पति और पत्नी, दोनों का उपस्थित रहना आवश्यक है!
उल्लेखनीय है कि…. श्रीराम मंदिर का संपूर्ण श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी की सियासी झोली में डालने के लिए, श्रीराम मंदिर आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभानेवाले अनेक लोगों को श्रीराम मंदिर समारोह में दूर रखा गया था, कुछ लोग कभी-कभी लालकृष्ण आडवाणी को याद भी कर लेते हैं, जबकि सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि- श्रीराम मंदिर निर्माण में पीएम मोदी का तो कोई योगदान नहीं है, जिन लोगों ने काम किया उनमें राजीव गांधी, पीवी नरसिम्हा राव और अशोक सिंघल के नाम शामिल हैं!
इन सबसे हटकर बलराज मधोक, जो जनसंघ के प्रमुख नेता रहे हैं और जिनका नाम अब सियासी स्क्रीन से गायब है, सबसे पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने श्रीराम मंदिर को लेकर आवाज बुलंद की थी?
यही नहीं, श्रीराम मंदिर को लेकर अदालत ने जो फैसला दिया है, बलराज मधोक ने कुछ-कुछ ऐसा ही समाधान पेश किया था!
बीबीसी की रिपोर्ट कहती है कि- 1968 में बलराज मधोक पहले नेता थे जिन्होंने अयोध्या में बाबरी मस्जिद हिंदुओं के हवाले करने की मांग उठाई थी. उसके बदले में उन्होंने हिंदुओं द्वारा मुसलमानों के लिए एक भव्य मस्जिद बनाने की पेशकश की थी?
कुछ लोगों को, आज लालकृष्ण आडवाणी के साथ जो सियासत हुई है, वह रास नहीं आ रही है, लेकिन ऐसी ही सियासत बलराज मधोक के साथ भी हुई थी, जब लालकृष्ण आडवाणी जनसंघ के अध्यक्ष थे और क्या पता, ऐसा ही कुछ नरेंद्र मोदी के साथ भी हो?
एक ज़माने में भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष रहे बलराज मधोक को उनकी पार्टी ने ही 1973 के कानपुर अधिवेशन के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया था?
और…. इसके बाद से ही उनकी बड़ी सियासी पारी समाप्त हो गई!
मजेदार बात यह हैे कि लालकृष्ण आडवाणी को जनसंघ से जोड़ने में भी बलराज मधोक की मुख्य भूमिका थी?
इस संबंध में पल-पल इंडिया में पहले भी लिखा गया था कि…. सबसे पहले श्रीराम मंदिर की आवाज बुलंद करने वाले नेता को बीजेपी ने काहे सियासी स्क्रीन से गायब कर दिया?
https://palpalindia.com/2022/08/07/New-Delhi-leaders-who-raised-voice-Shri-Ram-Mandir-BJP-disappeared-them-from-political-screen-news-in-hindi.html
श्रीराम मंदिर समारोह के सियासी फायदे के लिए राजनीतिकरण के सवाल उठे, तो अच्छी बात है कि संतो ने सही सलाह दी, खबरें हैं कि…. विहिप सूत्रों का कहना है कि संगठन को साधु-संतों ने यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि श्रीराम मंदिर का उद्घाटन एक गैर-राजनीतिक कार्यक्रम रहे!
विहिप अगले साल 1 जनवरी 2024 से एक राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत राजनीतिक संगठनों से संपर्क करना शुरू कर देगी, जो- पार्टी लाइन से ऊपर उठकर होगा?
जल्दी ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी नेताओं को विशेष रूप से पूजे गए पीले चावल दे कर आमंत्रित किया जाएगा!
खबरों की मानें तो…. विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल का कहना है कि- राजनीतिक विचारधारा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, हर इच्छुक व्यक्ति को, चाहे उनकी राजनीतिक संबद्धता कुछ भी हो, पवित्र अक्षत के साथ आमंत्रित किया जाएगा.
वैसे तो सनातन धर्म में सर्वोच्च सत्ता शंकराचार्य हैं, इसलिए श्रीराम मंदिर की प्रमुख पूजा शंकराचार्य को ही करनी चाहिए, लेकिन ऐसा हो पाएगा, यह लगता नहीं है, लेकिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की पूजा अमर्यादित नहीं हो इसके लिए जशोदाबेन को जरूर आमंत्रित करना चाहिए!
RAVAL KALPESH S @Ravalkalpesh_s
यह भाजपाई नेता सुब्रमण्यम स्वामी है, भक्तों आपको तो हमारी बात समझ में नहीं आएगी, आप खुद ही सुन लो राम मंदिर के लिए पहले श्रेय जाता है, स्वर्गीय राजीव गांधी को, नरसिम्हा राव को और अशोक सिंघल को, प्रधानमंत्री का इसमें कोई रोल नहीं है, उसने कुछ नहीं किया है….