नद़ी का तट
लगे कितना मनमोहक ये नद़ी का तट..! बैठू मैं जरा इत्मीनान से करू मैं बाते लतांत से ये बहती हवाओं शीतल देने लगी हैं सुकून… ये नज़ारे, ये हरियालियाँ बुझाने लगी हैं पहेलियाँ आसमानो में छायी ये काली घटाँ बरसा रहीं हैं हल्की सी वर्षा ये पेड़ की छाया देने लगी हैं मौन की माया…. … Read more