200 वर्षों की प्रतीक्षा का अंत, असम के चाय श्रमिकों को मिला भूमि का अधिकार- विक्रम कोइरी आइ ए एस
1823 में रॉबर्ट ब्रूस ने असम में जंगली चाय के पौधों की पहचान की थी। यह घटना भारत के इतिहास को एक नए ढंग से लिखने वाली साबित हुई। इसके बाद मजदूरों का बंधुआ प्रवासन शुरू हुआ और लाखों मजदूरों को असम लाया गया, जहाँ उन्हें चाय बागानों में काम पर लगाया गया। वह समय … Read more