भक्त-शिरोमणि हनुमान – चेतना के आदिकालीन नायक और आत्म-प्रकाश के पथदर्शक – डा. रणजीत कुमार तिवारी

डा. रणजीत कुमार तिवारी सहाचार्य एवं सर्वदर्शन विभागाध्यक्ष कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातनाध्ययन विश्वविद्यालय, नलबारी, असम भारतीय सांस्कृतिक चेतना में यदि कोई एक पात्र सर्वाधिक गहराई, सरलता और आध्यात्मिक ऊँचाई को समेटे हुए है, तो वह हैं – हनुमान। वे केवल एक पौराणिक चरित्र नहीं, बल्कि युगों से भारतीय मानस की आत्मा में प्रवाहित … Read more

महर्षि दयानंद एवं आर्य समाज

भारत में एक समय वह भी था, जब लोग कर्मकाण्ड को ही हिन्दू धर्म का पर्याय मानने लगे थे। वे धर्म के सही अर्थ से दूर हट गये थे। इसका लाभ उठाकर मिशनरी संस्थाएँ हिन्दुओं के धर्मान्तरण में सक्रिय हो गयीं। भारत पर अनाधिकृत कब्जा किये अंग्रेज उन्हें पूरा सहयोग दे रहे थे। यह देखकर … Read more

11 अप्रैल/जन्म-दिवस समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले

महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11 अप्रैल, 1827 को पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ था। इनके पिता श्री गोविन्दराव फूलों की खेती से जीवनयापन करते थे। इस कारण इनका परिवार फुले कहलाता था। महाराष्ट्र में उन दिनों छुआछूत की बीमारी चरम पर थी। अछूत जाति के लोगों को अपने चलने से अपवित्र हुई सड़क की सफाई … Read more

नकली दोस्ती को पहचानो

चलो छोड़ो उनको, ओ साथी, मुश्किल है अब कुछ भी कहना। मित्र ने कहा था संग रहेंगे, सुख-दुख में सदा साथ बहेंगे। दोस्ती चलेगी उम्रभर, उसकी बातों पर था विश्वास प्रखर। पर अब वही पहचान से इनकार करे, क्या वो सच्चा दोस्त कहे? अब वैसी बात नहीं रही, जो पहले सी दोस्ती में थी। इसलिए … Read more

क्या कृत्रिम तकनीक की आसान उपलब्धता से शिक्षा का भविष्य खतरे में है? – राजू दास

वर्तमान विश्व में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) तीव्र गति से आगे बढ़ रही है। यह हमारे जीवन को अधिक सरल बना रही है, समय और मेहनत की बचत कर रही है, और जटिल तथा विश्लेषणात्मक कार्यों को भी सहजता से पूरा कर रही है। लेकिन इस तकनीकी प्रगति के पीछे एक महत्वपूर्ण प्रश्न … Read more

महाबली हनुमान जी के जन्मोत्सव पर विशेष लेख

दुमदुमा (असम): महाबली हनुमान जी का जन्मोत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है, विशेष रूप से चैत्र मास में। यह पर्व प्रभु श्रीराम के परम भक्त, अंजनी और केशरी के पुत्र महाबली हनुमान जी के जन्म का प्रतीक है। हनुमान जी का बाल्यकाल नाम ‘मारुति’ था, और वह 108 विभिन्न नामों से प्रसिद्ध हैं, … Read more

भगवान महावीर: अहिंसा, अनेकांत और अपरिग्रह के युगपुरुष – डॉ. रणजीत कुमार तिवारी

डॉ. रणजीत कुमार तिवारी सहाचार्य एवं विभागाध्यक्ष, सर्वदर्शन विभाग कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातनाध्ययन विश्वविद्यालय, नलबाड़ी, असम भूमिका भारतीय अध्यात्म परंपरा में कुछ महापुरुष ऐसे हुए हैं जिन्होंने केवल आत्मकल्याण ही नहीं किया, अपितु समस्त मानवता को नैतिकता, सहिष्णुता एवं करुणा का पाथेय प्रदान किया। भगवान महावीर ऐसे ही युगपुरुष थे, जिन्होंने न केवल … Read more

ट्रम्प टैरिफ के कहर से दुनिया हलकान — आचार्य श्रीहरि

विश्व में एक और हिटलर की आहट सुनी जा रही है। एक और हिटलर की आहट को अनसुनी करने वाले घोर संकट को आमंत्रण दे रहे हैं। विश्व मंदी के संकट को जन्म देने वाले डोनाल्ड ट्रम्प आगे भी इसी तरह के हिटलरी कारनामे को अंजाम देते रहेंगे, ऐसी आशंका को खारिज करना मुश्किल है। … Read more

“शायद हम एक बार फिर इंसान बन सकें…” – राजू दास

आज भी यह दुनिया युद्ध को रोक नहीं सकी। सभ्यता का इतिहास जितना ज्ञान, तकनीक और विकास का है, उतना ही रक्त, विनाश और मृत्यु का भी इतिहास है। आज जब इस्राइल और फिलिस्तीन की ज़मीन पर बच्चों का खून धूल में मिल रहा है, तब सवाल उठता है—इस युद्ध को कौन चला रहा है? … Read more

8 अप्रैल/इतिहास स्मृति भगतसिंह एवं बटुकेश्वर दत्त ने असेम्बली मे बम्ब फेंका

बात 8 अप्रैल 1929 की है। दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में वायसराय ‘पब्लिक सेफ्टी बिल’ पेश कर रहे थे। इसके बाद ये बिल कानून बनना था। दर्शक दीर्घा खचाखच भरी थी। जैसे ही बिल पेश किया गया, सदन में एक जोरदार धमाका हुआ। दो लोगों ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगते हुए सदन के बीच … Read more