इतिहास के पन्नों में 17 अप्रैलः विश्व हीमोफीलिया दिवस

विश्व हीमोफीलिया दिवस 17 अप्रैल को मनाया जाता है। इस दिन को हीमोफीलिया के बारे में जागरुकता बढ़ाने के तौर पर जाना जाता है। वर्ष 1989 को विश्व हीमोफीलिया महासंघ द्वारा फ्रैंक श्रेबेल के जन्मदिन की स्मृति में यह दिवस मनाने की घोषणा की गई, जो कि हीमोफीलिया महासंघ के संस्थापक थे। हीमोफीलिया एक दुर्लभ … Read more

इतिहास स्मृति खालसा पंथ की स्थापना

गुरु तेग बहादुर जी की औरंगजेब द्वारा हत्या के बाद, उनके पुत्र श्री गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु बने। गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की और सिखों को ‘सिंह’ मतलब ‘शेर’ का नाम दिया था। खालसा के यदि शाब्दिक अर्थ की बात … Read more

बिहार: एक सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विकासशील राज्य नाम: दीपिका सिंह

नाम: दीपिका सिंह कॉलेज का नाम: गवर्नमेंट फर्स्ट ग्रेड कॉलेज रोल नंबर: U19GZ24A0193 कक्षा: बी.ए. द्वितीय सेमेस्टर (प्रथम वर्ष) बिहार भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है, जो अपनी समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। यह राज्य गंगा नदी के किनारे स्थित है और यहाँ कई प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक स्थल और … Read more

बिहु: असम की सांस्कृतिक चेतना और कृषि जीवन का जीवन्त उत्सव

बिहु: असम की सांस्कृतिक चेतना और कृषि जीवन का जीवन्त उत्सव डा. रणजीत कुमार तिवारी सहाचार्य एवं अध्यक्ष, सर्वदर्शनविभाग कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातन अध्ययन विश्वविद्यालय, नलबारी, असम भारत एक ऐसा राष्ट्र है जिसे यदि ‘त्योहारों की भूमि’ कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी। यहाँ की मिट्टी में केवल अनाज ही नहीं, बल्कि … Read more

यह भी देश प्रेम है।

हमारे जांबाज सेना के कार्य देश भक्ति व देश प्रेम की सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इनकी तुलना हम कतई नहीं कर सकते हैं।देश इनका ऋणी रहता है। इसके अतिरिक्त हम कई तरह से देश हित के लिए कार्य कर देश प्रेम की भावना को दर्शा सकते हैं। देश प्रेम एक ऐसी भावना है,जो हमारे अंतर्मन में … Read more

संस्कृत: भारत की सांस्कृतिक एकता की सेतु–भाषा — डॉ. आंबेडकर की दूरदृष्टि में – डा. रणजीत कुमार तिवारी

डा. रणजीत कुमार तिवारी सहाचार्य एवं अध्यक्ष सर्वदर्शन विभाग कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं पुरातनाध्ययन विश्वविद्यालय, नलबारी, असम प्रस्तावना संस्कृत भाषा, भारतीय सभ्यता की आत्मा और ऋषियों की वाणी है। यह केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, अपितु उस गूढ़ ज्ञान का संवाहक है जिसने वेदों, उपनिषदों, दर्शनशास्त्र, काव्य, नाटक, गणित, खगोल, और चिकित्सा जैसे विविध … Read more

एक फरिश्ता…

आये थे जिंदगी में मेरे लाये थें खुशियों के मेले लगे थे जीने जिंदगी दूर हुई थी सिरी बंदगी काँटो से भरा वह पल हुए थे मखमल समझने लगे थे खुद को खुशनसीब, जब आये थे आप करीब.. भूल गए थे सारे गम जब देखकर आपको हुई थी आँखे नम, फिर क्यों देदी ऐसी उदासी … Read more

बिहू आईं, बिहू आईं

बिहू आईं, बिहू आईं, रंगाली बिहू आईं रे खुशियाँ लाईं, उल्लास लाईं, रंगाली बिहू आईं रे।। कोयल करे कुहू-कुहू, हुचरी की मस्ती छाई रे, पेड़ों पर नई पत्तियाँ आईं, बगिया में फूल मुसकाई रे।। बिहू आईं, बिहू आईं, रंगाली बिहू आईं रे फागुन गया, वसंत संग बैसाखी भी आई रे। खेत-खलिहान झूम उठे, फसलें भी … Read more

12 अप्रैल/जन्म-दिवस कुशल संगठक सुन्दर सिंह भण्डारी

श्री सुन्दर सिंह भंडारी का जन्म 12 अप्रैल, 1921 को उदयपुर (राजस्थान) में प्रसिद्ध चिकित्सक डा. सुजानसिंह के घर में हुआ था। 1937-38 में कानपुर में बी.ए. करते समय वे अपने सहपाठी दीनदयाल उपाध्याय के साथ नवाबगंज शाखा पर जाने लगे। भाऊराव देवरस से भी इनकी घनिष्ठता थी। 1940 में नागपुर से प्रथम वर्ष का … Read more

राणा सांगा (80 घाव लगे थे तन पर, फिर भी व्यथा नही थी मन पर)

महाराणा संग्रामसिंह ऊर्फ राणा सांगा का जन्म12अप्रैल 1482 को मेवाड़ के चित्तौड़ में हुआ था। राणा सांगा सिसोदिया राजवंश के सूर्यवंशी शासक थे। यह पहली बार ऐसा था जबकि उन्होंने विदेशी आक्रमणकारियों के खिलाफ सभी राजपूतों को एकजुट कर लिया था। उन्होंने दिल्ली, गुजरात, मालवा के मुगल बादशाहों के आक्रमणों से अपने राज्य कि बहादुरी … Read more