बाबा

बाबा — — — — — — — — बाबा बहुत ज़्यादा बातें नहीं करते थे। बाबा बहुत कम ही बोलते थे। बाबा मतलब शनिवार रात का इंतज़ार, पेट्रोल के धुएँ की गंध, देवदार के पेड़ों की शालीनता, दूर्वा घास पर टिकी ओस की बूँदों को चीरकर आती धूप के मोती, या दस रुपये की … Read more

क्यूं कि सिकरांत आयगी है.

क्यूं कि सिकरांत आयगी है. अजी सुणो हो के झिमली का बापूऊऊऊ ? सिंकरात आयगी है, पिछली बेर तो मं पेट सूं थी,पण पण ईबकी सिंकरात जोर शोर सूं करस्यूं. सोई आज तो तिल,गुड़, काल चोखी सी कांबल, अर गरम सुटर, परस्यूं घेवर फिणी लाणी है. अर परले दिन सुंवारे पेली जल्दी उठकर कूंआ पर … Read more

समाज के रीति- रिवाज में परिवर्तन जरुरी

समाज के रीति- रिवाज में परिवर्तन जरुरी समाज के रस्में- रिवाज में सुधार के लिए परिवर्तन स्वीकार योग्य है। यही वजह है कि आज हमारे समाज के रीति- रिवाज में कई सुधारवादी परिवर्तन देखने को मिल रहा है। समयानुसार समाज में सुधार योग्य परिवर्तन आवश्यक भी है। पहले यह प्रथा प्रचलित थी कि पुत्र के … Read more

ग्रामीण-केंद्रित भारतीय सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यशास्त्रीय भाष्यकार : मुंशी प्रेमचंद

ग्रामीण-केंद्रित भारतीय सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यशास्त्रीय भाष्यकार : मुंशी प्रेमचंद बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक काल में जिन कुछ मनीषी साहित्यकारों ने भारतीय साहित्य पर गहरा, स्थायी और व्यापक प्रभाव डाला, उनमें मुंशी प्रेमचंद सर्वप्रथम स्मरणीय हैं। साहित्य-जगत में वे सर्वमान्य रूप से ‘उपन्यास-सम्राट’ के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ। … Read more

।। जिधर मैं, उधर तुम ।।

।। जिधर मैं, उधर तुम ।। प्राणों की कम्पन में तुम, हृदय की धड़कन में तुम… मेरे अस्तित्व का सार तुम, मेरे हर श्वास का आधार तुम… ।। मेरी सांसों में छुपी हुई है तेरी सांसे… मन में मेरे एक रेखा बसी है तेरी… सांसों में तुम, मन में भी तुम… हृदय में तुम, सर्वत्र … Read more

ग्रामीण-केंद्रित भारतीय सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यशास्त्रीय भाष्यकार : मुंशी प्रेमचंद

ग्रामीण-केंद्रित भारतीय सामाजिक यथार्थ के सौंदर्यशास्त्रीय भाष्यकार : मुंशी प्रेमचंद बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक काल में जिन कुछ मनीषी साहित्यकारों ने भारतीय साहित्य पर गहरा, स्थायी और व्यापक प्रभाव डाला, उनमें मुंशी प्रेमचंद सर्वप्रथम स्मरणीय हैं। साहित्य-जगत में वे सर्वमान्य रूप से ‘उपन्यास-सम्राट’ के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उनका जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ। … Read more

नववर्ष के परिप्रेक्ष्य मे राष्ट्रकवि श्रद्धेय रामधारी सिंह ” दिनकर ” जी की कविता..

कुछ मित्रों ने अभी से नव वर्ष की अग्रिम शुभकामना की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दिया है । इस परिप्रेक्ष्य मे राष्ट्रकवि श्रद्धेय रामधारी सिंह ” दिनकर ” जी की कविता.. *ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं,*             *है अपना ये त्यौहार नहीं* है अपनी ये तो रीत नहीं,     … Read more

रामानंद सागर : भारतीय दूरदर्शन के स्वर्णिम युग के शिल्पकार

रामानंद सागर : भारतीय दूरदर्शन के स्वर्णिम युग के शिल्पकार -सुनील कुमार महला भारतीय टेलीविजन के सांस्कृतिक शिल्पकार, निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर को आखिर कौन नहीं जानता ? उनका जन्म लाहौर के नजदीक असल गुरु नामक स्थान पर 29 दिसम्बर 1917 को एक धनाढ्य परिवार में हुआ था। उनका मूल नाम चंद्रधर शर्मा था।वे भारतीय टेलीविजन … Read more

नववर्ष का संकल्प-पथ”  (नववर्ष 2026 विशेष कविता)

नववर्ष का संकल्प-पथ”  (नववर्ष 2026 विशेष कविता) नया साल एक नया सवेरा, बीते कल से सीख का घेरा। अनुभवों की गठरी संग लिए, आगे बढ़ने का देता फेरा। जो बीत गया, वह शिक्षक है, जो आने वाला, अवसर है। हर क्षण में छिपा है संदेश, कर्म ही जीवन का आधार है। जीवन की शुरुआत में … Read more

सरस्वती विद्यानिकेतन, मालुग्राम द्वारा शिक्षा का एक अभिनव प्रयास

सरस्वती विद्यानिकेतन, मालुग्राम द्वारा शिक्षा का एक अभिनव प्रयास शिलचर शनिवार, 27 दिसंबर 2025: शिक्षा का दायरा केवल कक्षा और विद्यालय भवन तक सीमित नहीं होता। परिवेश से मिलने वाली अनुभूतियाँ भी बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। खुले वातावरण में बच्चे न केवल स्वच्छंद रूप से खेलते हैं, बल्कि कला और … Read more