कही हज़ारो मे मिलते, दो चार है हमलोग।।

कभी शाख मे है तो कभी जड़ मे है हमलोग, कही हज़ारो मे मिलते, दो चार है हमलोग।। यूँ तो मिलते नहीं काश ढूंढ़ने से भी कभी कभी मिल जाते है आँगन मे टहलते हुए हमलोग।। हम कौन है और किस वजह से है, क्या बताये कभी यूँ ही बेवजह ज़िन्दगी जी लेते है हमलोग।। … Read more

शिलचर मेडिकल कॉलेज में 6 फरवरी को हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश गोपाल देखेंगे मरीज

चेन्नई के वरिष्ठ इंटरवेंशनल हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ राकेश पी गोपाल शिलचर मेडिकल कॉलेज और हास्पिटल में 6 फरवरी को आउटडोर में मरीज देखेंगे। डॉ राकेश को मरीज दिखाने के इच्छुक व्यक्ति सोमवार, बुधवार व शुक्रवार को सुबह 8:00 से 12:00 के बीच अपना नाम पंजीकृत करा सकते हैं। विशेष जानकारी के लिए 863 893 … Read more

उत्तरपूर्व पर केंद्रित पत्रिका “प्राग्ज्योतिका” के दूसरे अंक का लोकार्पण असम के उत्तरकमलाबाड़ी सत्र के सत्राधिकार श्री श्री जनार्दनदेव गोस्वामी प्रभु और माननीय मुख्यमंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल के करकमलों से हुआ।

साहित्य, मानविकी, समाज विज्ञान, और प्रदर्शनधर्मी कलाओं पर केंद्रित ‘प्राग्ज्योतिका’ पत्रिका का वर्तमान अंक महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव पर केंद्रित है। प्राग्ज्योतिका एक त्रैमासिक पत्रिका है जो प्रो. चन्दन कुमार के सम्पादकत्व में निकलती है। प्रो. चन्दन दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में प्राध्यापक हैं और कई वर्षों से पूर्वोत्तर भारत के साहित्य, समाज और संस्कृति … Read more

योग से सुखी जीवन पाएँ

आज के स्थिति में हर इंसान खुश रहना चाहता हैं मगर वह खुश नही रहता क्यों कि सुबह जगते ही वह अनेक विचारों को साथ लेकर ही जगता हैं इसलिए दिन निकलने से पहले ही इंसान की समस्याए निकलती हैं | और निर्माण हुई समस्या से बाहर आने के लिए और नई समस्या निर्माण करता … Read more

इस हिंसा के असली दोषी- अवधेश कुमार

निस्संदेह, गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली में ट्रैक्टर परेड के नाम पर हुई हिंसा के कारण पूरे देश में क्षोभ का माहौल है। लेकिन अगर आप कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर आंदोलन कर रहे नेताओं के बयान और तेवर देखिए तो आपका गुस्सा ज्यादा बढ़ जाएगा। इनमें से कोई भी इस … Read more

*श्री राम जन्मभूमि मंदिर के लिए अनापेक्षित निधि का समर्पण*

घटना कल नासिक के भद्र काली मंदिर की है। यहाँ राम जन्मभूमि के लिए निधि समर्पण के कार्यालय का उद्घाटन कार्यक्रम था। ये मंदिर गाँव में है जहाँ कुछ पेड़ियाँ चढ़ कर दर्शन के लिए जाना होता है। यहाँ कार्यालय हो, ये कार्यकर्ताओं की इच्छा थी। त्यौहार, महोत्सव आदि अवसर पर यहाँ काफ़ी भीड़भाड़ रहती … Read more

फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं?

फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं? —- नीलू गुप्ता, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल गणतंत्र दिवस पर आज मैंने ख़ूब बधाइयां पाई! पर सच्ची गणतंत्रता देखने को अब भी है आंखें पथराई ! हिस्से में आज जनता के कैसी बदहाली आईं, काम बिना रिश्वत के कोई आज भी न बन पाई! फिर कैसी गणतंत्रता यह आईं पर सबने … Read more