पतलू के जवाब पर पंचायत नतमस्तक ( हास्य व्यंग्य)

  गावों की संस्कृति से रुबरु कराते हुए मुझे दूर बैठे अपने ग्राम के दर्शन करने एवं स्वयं की उपस्थिति समझकर साहित्य की लकीर से हटकर ऐसे शब्दों का प्रयोग भी आप सबके लिए इसलिए कर रहा हूँ कि आप सभी को आनंद मिले भले ही संकोची पाठक प्रतिक्रिया ना दे।    जब हम बङे … Read more

भारतीय इक्विटी और इण्डेक्स का कमाल विश्व बेहाल-(3)—आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! विश्व के रंगमंच पर जब भी आर्थिक स्तर की -“स्तरीय” चर्चा होती थी तो भारत समूचे विश्व में द्वितीय स्तर की अपनी जनसंख्या होने के बाद भी-“अति निर्धन अविकसित देशों” की कतार में विश्व बैंक के समक्ष आज के पाकिस्तान की तरह भिक्षा पात्र लिये बैठा दिखता था ! किन्तु आजकी परिकल्पना … Read more

बच्चा बच्चा राम का जन्मभूमि के काम का-(2)—शास्त्री सिलचर,

सम्माननीय मित्रों ! विश्व हिन्दू परिषद द्वारा आयोजित प्रथम एकात्मता गंगा यात्रा में रथारूढ माँ भारती एवं विशाल ताम्र कलश में गंगाजल था ! प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी छे इंच मोटी लगभग 8×8 फुट की चौडी प्लेट पर भगवे ध्वज के साथ भारत के मानचित्र मध्य मेरी माँ भारती विराजमान थीं ! जिस नगर,गांव,सडकों … Read more

मोह

क्यूं लिपटा है, इस मोह जाल में कुछ ना साथ जाएगा, जिसे मोह पड़ा हो डाल का वो पक्षी ना अब उड़ पायेगा। |जिसके पीछे दौड़ रहा तू मैं तो मिथ्या साया हूँ, मैं मोह दुःखदायक कहलाता हूँ।। करूंमती के सौन्दर्य के वशीभूत, ब्रह्मदत्त ने बांधे नगर के द्वार ये बेड़िया ऐसी है, जो ना … Read more

अनेकता में एकता हिन्दू की विशेषता-(1) — आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! शताब्दियों से चले आ रही मुस्लिम  आक्रांताओं द्वारा दिये गये हमारी सांस्कृतिक अस्मिता पर लगे घावों के प्रथम चिन्ह को अंततः हमारे यशस्वी प्रधानमन्त्री श्रीमान नरेन्द्र दामोदर दास मोदी जी के भगीरथी प्रयास से मिटाने की वो घडी आ गयी जिसकी प्रतिक्षा में हमारे आपके पूर्वजों ने न जाने कितनी बार अपना … Read more

नव वर्ष की तैयारी

  आने वाले वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ स्वागत दिल से मैं करूं ऐ दिसम्बर। तुम जाते-जाते अच्छा कर जाना। संग ले जाना इन कड़वी यादों को, सौगात खुशियों की तुम दे जाना। ऐसा साल न आये जीवन में कभी, इंसानों को जिसने अलग किया, यादें ही रह गई दिलों में, जिसने अपनों को खो दिया। … Read more

मोह

  क्यूं लिपटा है, इस मोह जाल में कुछ ना साथ जाएगा, जिसे मोह पड़ा हो डाल का वो पक्षी ना अब उड़ पायेगा। |जिसके पीछे दौड़ रहा तू मैं तो मिथ्या साया हूँ, मैं मोह दुःखदायक कहलाता हूँ।। करूंमती के सौन्दर्य के वशीभूत, ब्रह्मदत्त ने बांधे नगर के द्वार ये बेड़िया ऐसी है, जो … Read more

सवामणी पांच सौ भक्तों में वितरित करें हर महीने आयोजन हो

आज सवामणी प्रायः हर भक्त लगाने में सक्षम हो गया लेकिन अतीत में बहुत ही कम सवामणी लगती थी। इसमें सवा मण यानि पचास सेर  प्रसाद लगाया जाता है लेकिन 51 सेर शुभ होने से भक्त गण आजकल 51 किलोग्राम वजन की सवामणी लगाते हैं। लेकिन विभिन्न कारणों से प्रसाद कम बनाने से वो अधुरी … Read more

जीवन में पश्चात्ताप से बचना है तो समय पर पहल करना सीखें — सीताराम गुप्ता,

मैं जब भी किसी नए विषय पर कोई आलेख अथवा कथा-कहानी आदि लिखने बैठता हूँ तो लिखने से पूर्व प्रायः मन में ये विचार आता है कि ये रचना करना ठीक भी रहेगा या नहीं। कहीं संपादक, प्रकाशक अथवा पाठक इसे मज़ाक़ में न ले लें अथवा सतही रचना समझ कर नकार न दें। यदि … Read more

चाय उद्योग की सुनो पुकार-वरना होगा बंटाधार-(1)— आनंद शास्त्री

सम्माननीय मित्रों ! पहले जब कभी यहाँ अर्थात अखण्ड असम में यत्र तत्र सर्वत्र घनघोर जंगल थे ! प्रकृति के आंचल तले हमारे गिरिवासी वनवासी सीधे सादे सच्चे लोग बसते थे अर्थात लगभग सन् 1821 के आसपास इस्ट इंडिया कम्पनी ने सर्वप्रथम दो उद्योगों की नींव रखी थी! वे स्वार्थी तत्त्व थे ! उनकी दृष्टि … Read more