विदेश मे पइसा झारऽता केहू   (हास्य कविता)

रंबल मे भेड़-बकरी चारऽता केहू माजरा मे दुध-दही गारऽता केहू एम्प्लोमेंट वीज़ा तऽ भागे से मिले विजिट पऽ आके अंडा पारऽता केहू। सउदी मे जाके फँसलन फालाना दुबई मे दिरहम झारऽता केहू। बाग-बगऽइचा सँवारऽता केहू लोहा मे वेल्डिंग मारऽता केहू फरसटेशन तऽ इंहवा सबके भितर मउगी के दिन-रात तारऽता केहू। कुवैत मे जाके रोवे फालाना … Read more

राशिफल: 06 फरवरी, 2024

मेष : आपके पूंजीगत निवेशों से भी लाभ होगा। पारिवारिक उत्तरदायित्व अधिक रहेंगे। पदोन्नति मिलने का योग है। आमदनी में वृद्धि होगी। यात्रा में सावधानी बरतें। क्षमता से अधिक कार्य करने से मर्ज बिगड़ सकता है। मनचाहा स्थानांतरण मिल सकता है। अपने लक्ष्य के प्रति सजग रहें। शुभांक-२-५-६: वृष : संतान की ओर से हर्ष … Read more

चलती है हरदम कवि के कलम।

दुनिया को पन्ने में            समेटते है। कभी झुंझलाते है कभी खुशी में झूम उठते हैं। कभी अश्कों से समंदर भर देते है। हर किसी के भावों को    आसानी से समझ जाते है हर स्थिति में     चलती है हरदम कवि के कलम। दर्शन को व्यक्त कर लेते है … Read more

मुख्य यजमान बनाम पगङीधारी ( हास्य व्यंग्य)

धार्मिक कार्यक्रम में एक रोडमैप तैयार करके आयोजन समिति धन संग्रह के लिए अनेक यजमान तथा एक मुख्य यजमान आर्थिक दृष्टि से  बनाती है जो अधिक धन देगा वो मुख्य यजमान फिर विशेष यजमान कम देने वाले साधारण यजमान जो फोरी तोर एवं परंपरागत तो ठीक ही है लेकिन धन के आधार पर मैरिट बनाकर … Read more

उत्कृष्ट व उपयोगी सृजन के लिए अनिवार्य है मौन — सीताराम गुप्ता,

वसंत के प्रारंभ में कड़कड़ाती शीत ऋतु में असंख्य वनस्पतियाँ व वृक्ष पत्ररूपी अपने समस्त वस्त्र गिराकर ठूँठ से खड़े दृष्टिगोचर होते हैं लेकिन वास्तव में वे जड़वत नहीं एक साधक की तरह चुपचाप साधना में लीन होते हैं। मौन साधना में लीन। कुछ  समय उपरांत इसी मौन साधना की परिणति होती है उनके कोमल … Read more

भविष्योन्मुखी बजट— डॉ. अभिषेक कुमार पाण्डेय

  मोदी सरकार का ये बजट 2024-2025, भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत आर्थिक भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावशाली कदम माना जाना चाहिए। जैसा कि लोगो ने एक लोकलुभावन बजट की उम्मीद की थी पर वैसा कुछ भी नहीं हुआ खास कर वेतनभोगी एवं उद्योगपति वर्ग में कर राहत को लेकर कुछ उम्मीद की … Read more

ऋतुओं का राजाधिराज वसंत है आया…!

मंजरियां खिल रही हैं आम्र टहनियां हैं झूम रहीं भ्रमरों और मधुमक्खियों का गुंजन है तितलियां फूलों के रसास्वादन में मशगूल हैं। ऋतुओं का राजाधिराज वसंत है आया…! मृदु कोमल कच्चे वृंत इठलाये बावली, मस्तमौला हवाएं झूम रहीं हैं आज फिजाएं धूप बिछ रही है मैदानों, पठारों और पहाड़ों में। ऋतुओं का राजाधिराज वसंत है … Read more

नीतीश का भाजपा के साथ आना ऐसी अंतिम घटना नहीं होगी — अवधेश कुमार

बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम में ऐसा कुछ नहीं है जिसमें कोई चौंकाने वाला तत्व तलाशे। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता की राजनीति में पलटने और पलटवाने का ऐसा जुगुप्सापूर्ण प्रतिमान रचा है जिसकी तुलना राजनीति में किसी भी पाला बदल से नहीं हो सकती। एक ही सरकार के साढ़े तीन वर्ष में तीन … Read more

तीन चौथाई आन्हर ” – कैलाश गौतम

बाबू आन्हर माई आन्हर हमै छोड़ सब भाई आन्हर के-के, के-के दिया देखाई बिजुली अस भउजाई आन्हर॥ हमरे घर क हाल न पूछा भूत प्रेत बैताल न पूछा जब से नेंव दियाइल तब से निकल रहल कंकाल न पूँछा ओझा सोखा मुल्ला पीर केकर-केकर देईं नजीर जंतर-मन्तर टोना-टोटका पूजा पाठ दवाई आन्हर॥ जे आवै ते … Read more

विपक्षी एकता का ढहता किला — आशीष वशिष्ठ

इंडी गठबंधन के बारे में राजनीति की समझ रखने वाले अधिकतर व्यक्तियों के अनुमान सही साबित हुए। गठबंधन की पहली बैठक के बाद से ही उसके भविष्य के बारे में जो कुछ कहा जा रहा था, वो शब्दशः धरती पर उतरता दिख रहा है। वास्तव में इंडी नामक विपक्षी गठबंधन में चूंकि वैचारिक साम्यता नहीं … Read more