गड़रिए
गड़रिए अक्सर निर्जन में रहते हैं प्रकृति के ख्यालों में गुम रहते हैं वनस्पतियों, पेड़-पौधों से बतियाते बतियाते ढ़ोर से धरती की हर कोर से पहाड़,पठार और मैदान झीलों, नदियों, आंधी-तूफान, खग भ्रमर, तितलियों और मधुमक्खियों से बतियाते बतियाते जल, नभ और थल से रम-बस जाते दिन में सूरज और धरती से डंगर -ढ़ोर के … Read more