भक्ति मनुष्य के मन के भावों को सँवारने का साधन हो सकती है साध्य नहीं– सीताराम गुप्ता
रामचरितमानस में एक स्थान पर गोस्वामी तुलसीदास जी लिखते हैं – जेहि का जेहि पर सत्य सनेहू, सो तेहि मिलहिं न कछु सन्देहू अर्थात् जिसको जिस चीज़ से सच्चा प्रेम होता है उसको वह चीज़ अवश्य मिल जाती है इसमें संदेह नहीं। कहने का तात्पर्य यही है कि सच्चे मन से चाही गई वस्तु अवश्य … Read more